नई दिल्ली: किसानों के लिए हर मौसम अपने साथ नई चुनौतियां लेकर आता है। गेहूं, सरसों, चना, प्याज और सब्जियों की फसलों पर कीट और रोग का खतरा हमेशा बना रहता है। अगर समय पर सावधानी न बरती जाए तो किसानों की मेहनत और फसल दोनों को नुकसान हो सकता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि हर मौसम में फसल सुरक्षा के कारगर उपाय अपनाना किसानों के लिए काफी ज़रूरी है। मसलन – सही समय पर छिड़काव, नियमित निगरानी और वैज्ञानिक तरीकों से खेती। इससे किसान अपनी फसल को सुरक्षित रख सकते हैं और बेहतर उत्पादन हासिल कर सकते हैं।
गेहूं की फसल में दीमक से बचाव
अगर गेहूं की फसल में दीमक का प्रकोप दिखाई दे तो तुरंत नियंत्रण जरूरी है। इसके लिए क्लोरपायरीफॉस 20 ई.सी. का प्रयोग करने की सलाह दी गई है। 2 लीटर दवा को 20 किलो बालू में मिलाकर प्रति एकड़ की दर से शाम के समय खेत में छिड़काव करें। इससे दीमक का असर कम होगा और फसल सुरक्षित रहेगी।
सरसों की फसल में चेंपा कीट पर निगरानी
सरसों की फसल में चेंपा कीट तेजी से फैलता है। विशेषज्ञों के अनुसार, खेत की लगातार निगरानी करें और जहां भी प्रभावित पौधे दिखें, उन्हें तुरंत काटकर खेत से बाहर फेंक दें। इससे कीट पूरे खेत में फैलने से रोका जा सकता है।
चने की फसल में फली छेदक कीट नियंत्रण
चने की फसल में फली छेदक कीट से बचाव के लिए फेरोमोन ट्रैप 3-4 प्रति एकड़ लगाने की सलाह दी गई है। यह तब करें जब फसल में 10-15 प्रतिशत फूल आ चुके हों। साथ ही खेत में अलग-अलग स्थानों पर ‘T’ आकार के पक्षी बैठने के स्टैंड लगाएं, जिससे कीट नियंत्रण में प्राकृतिक संतुलन बना रहे।
कद्दूवर्गीय सब्जियों के लिए बीज तैयारी
कद्दूवर्गीय सब्जियों की अच्छी फसल के लिए बीजों को छोटे पॉलिथीन थैलों में भरकर पॉलीहाउस या सुरक्षित स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। इससे बीज सुरक्षित रहते हैं और स्वस्थ पौध तैयार होती है।
बन्दगोभी, फूलगोभी और गांठगोभी की रोपाई
इस मौसम में बन्दगोभी, फूलगोभी और गांठगोभी की रोपाई खेत की मेड़ों पर की जा सकती है। रोपाई से 10-15 दिन पहले 20-25 टन सड़ी गोबर की खाद डालें। अंतिम जुताई में 20 किलो नाइट्रोजन, 60-70 किलो फॉस्फोरस और 80-100 किलो पोटाश प्रति हेक्टेयर मिलाएं। पौध से पौध की दूरी 10 सेमी और कतार से कतार की दूरी 15 सेमी रखें।
पालक, धनिया और मेथी की बुवाई
इस समय पालक, धनिया और मेथी की बुवाई उपयुक्त मानी जाती है। पत्तों की अच्छी बढ़वार के लिए 20 किलो यूरिया प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करें। इससे पत्तियां हरी, कोमल और पौष्टिक बनेंगी।
गाजर में बीज उत्पादन की तैयारी
गाजर के बीज उत्पादन के लिए 90-105 दिन की फसल को जनवरी के पहले पखवाड़े में खोदने की सलाह दी गई है। लंबी और स्वस्थ गाजर का चयन करें, जिनमें पत्ते कम हों। पत्तियों को 4 इंच ऊपर से काटकर बीज वाली गाजर को 45 सेमी कतार दूरी और 6 इंच पौध दूरी पर लगाएं और तुरंत सिंचाई करें।
प्याज की सही रोपाई
प्याज की रोपाई तैयार खेतों में करें। पौध की उम्र छह सप्ताह से अधिक नहीं होनी चाहिए। रोपाई छोटी क्यारियों में करें और पौध से पौध की दूरी 6 इंच तथा कतार से कतार की दूरी 45 सेमी रखें।
गोभीवर्गीय फसलों और सब्जियों में कीट नियंत्रण
गोभीवर्गीय फसलों में हीरा पीठ इल्ली, मटर में फली छेदक और टमाटर में फल छेदक की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप 3-4 प्रति एकड़ लगाएं। इससे कीटों की संख्या पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता है।
गेंदे की फसल में रोग से बचाव
गेंदे की फसल में पुष्प सड़न रोग पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। लक्षण दिखने पर बाविस्टिन 1 ग्राम प्रति लीटर या इंडोफिल-एम 45 की 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। इससे रोग का प्रसार रोका जा सकता है।
सही समय पर उपाय से सुरक्षित होगी फसल
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान इन सभी उपायों को समय पर अपनाएं तो फसल को कीट और रोगों से सुरक्षित रखा जा सकता है। सही दूरी पर रोपाई, संतुलित खाद, समय पर छिड़काव और नियमित निगरानी से न केवल फसल स्वस्थ रहेगी, बल्कि पैदावार और किसानों की आय में भी बढ़ोतरी होगी।
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