नई दिल्ली: भारत में आम केवल एक फल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक पहचान का अहम हिस्सा है। देश में करीब 22 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में आम की खेती की जाती है। इसके बावजूद कई बार जानकारी के अभाव में किसान आम के मंजर और फल बनने की अवस्था में कुछ गलतियां कर बैठते हैं, जिससे उत्पादन पर बड़ा असर पड़ता है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा बिहार के पौधा रोग विज्ञान विभाग के प्रमुख डॉ. एस. के. सिंह के अनुसार, आम के मंजर से फल बनने तक का समय बेहद संवेदनशील होता है। इस दौरान संतुलित सिंचाई, सही कीटनाशक और सूक्ष्म पोषक तत्वों का प्रयोग करने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
मंजर से फल बनने तक का समय सबसे संवेदनशील
विशेषज्ञों के अनुसार आम के बाग में मंजर निकलने से लेकर टिकोले के मटर के दाने के आकार तक पहुंचने की अवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है। इस समय प्राकृतिक कारणों से लगभग 85 से 95 प्रतिशत तक फूल और छोटे फल झड़ जाते हैं। तापमान में अचानक वृद्धि और हवा में नमी की कमी इसका मुख्य कारण होती है। जब तापमान 32 से 33 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला जाता है और आर्द्रता 25 प्रतिशत से कम हो जाती है, तो परागकण सूखने लगते हैं। इससे बचाव के लिए किसानों को बाग की नियमित निगरानी करनी चाहिए और मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखनी चाहिए ताकि पौधों पर तापमान का तनाव कम हो सके।
टिकोले गिरने से बचाने के उपाय
जब छोटे फल मटर के दाने के बराबर हो जाएं, तब पौधों को अतिरिक्त पोषण देना जरूरी हो जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार इस अवस्था में पोटैशियम नाइट्रेट का छिड़काव लाभकारी होता है। साथ ही बोरॉन 0.2 प्रतिशत या बोरॉन और जिंक का मिश्रण छिड़कने से परागण और निषेचन प्रक्रिया मजबूत होती है और फल की पकड़ बढ़ती है। फलों को गिरने से बचाने के लिए एनएए प्लानोफिक्स का एक मिली प्रति तीन लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करना भी प्रभावी माना जाता है। इस समय हल्की सिंचाई शुरू कर देनी चाहिए, लेकिन खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए।
कीट और रोगों से बचाव जरूरी
मार्च के महीने में उत्तर भारत का मौसम अपेक्षाकृत शुष्क रहता है, जो मधुआ कीट और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे रोगों के लिए अनुकूल होता है। मधुआ कीट के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल का एक मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है। यदि मंजर पर सफेद पाउडर जैसा लक्षण दिखाई दे, तो घुलनशील गंधक यानी सल्फर दो ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करना चाहिए।
परागण करने वाले कीटों की सुरक्षा भी जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि फूल पूरी तरह खिले होने की अवस्था में किसी भी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे परागण करने वाले लाभकारी कीट नष्ट हो सकते हैं। आम के फल बनने में परागण की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। अध्ययनों से पता चला है कि यदि बाग में मधुमक्खियां सक्रिय रहती हैं, तो फल लगने की दर 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। इसलिए प्रति हेक्टेयर 10 से 12 मधुमक्खी के बक्से रखना लाभकारी माना जाता है।
अधिक गर्मी में अपनाएं ये उपाय
पिछले कुछ वर्षों में मौसम के पैटर्न में तेजी से बदलाव देखा गया है। कभी अचानक तेज गर्मी तो कभी बेमौसम बारिश आम की फसल को प्रभावित करती है। ऐसे में यदि अत्यधिक गर्मी या शुष्क हवाएं चल रही हों, तो समुद्री शैवाल अर्क या अमीनो अम्ल आधारित पोषक तत्वों का हल्का छिड़काव पौधों को मौसम के तनाव से बचाने में मदद करता है। विशेषज्ञों का यह भी सुझाव है कि इस समय यूरिया का प्रयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे पत्तियों की वृद्धि अधिक होती है और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
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