Site icon Krishi Pitaara

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव से पिस्ता-अंजीर महंगे, बाजार में बढ़ी चिंता

Rising tensions in the Gulf region dry fruits

नई दिल्ली: खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अब भारतीय बाजारों में साफ दिखाई देने लगा है। खासकर पिस्ता, अंजीर और किशमिश जैसे सूखे मेवों की कीमतों में तेजी दर्ज की जा रही है। भारत बड़ी मात्रा में पिस्ता ईरान और अमेरिका के कैलिफोर्निया से आयात करता है, लेकिन मौजूदा हालात के चलते ईरान से आपूर्ति बाधित हो गई है। व्यापारियों के मुताबिक पिस्ता के दाम ₹40 से ₹100 प्रति किलो तक बढ़ चुके हैं। पहले पिस्ता दाना ₹1,500-1,600 प्रति किलो और छिलके वाला पिस्ता ₹1,200-1,300 प्रति किलो बिक रहा था, जिसमें अब तेजी देखी जा रही है।

बंदरगाह बंद होने से आपूर्ति ठप

ईरान के प्रमुख बंदरगाहों, जिनमें बंदर अब्बास बंदरगाह और चाबहार बंदरगाह शामिल हैं, के बंद होने से निर्यात गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। भारत के लिए समुद्री मार्ग मुख्य आपूर्ति साधन था, लेकिन बंदरगाहों पर गतिविधियां रुकने से सूखे मेवों की खेप अटक गई है। पहले से भारत-पाकिस्तान तनाव के कारण अफगानिस्तान से आने वाली खेप प्रभावित थी, ऐसे में ईरान से सप्लाई रुकने से बाजार में अनिश्चितता और बढ़ गई है।

होली के कारण फिलहाल सीमित असर

दिल्ली और उत्तर भारत के बाजारों में अभी असर सीमित दिखाई दिया है। व्यापारियों का कहना है कि होली के त्योहार के कारण कई दिन बाजार बंद रहे, जिससे खरीद-फरोख्त कम रही और अचानक बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा। हालांकि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव की वजह से उत्पन्न स्थिति अगर जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में कीमतों में और वृद्धि संभव है।

अंजीर और किशमिश पर भी दबाव

अंजीर की आपूर्ति मुख्य रूप से अफगानिस्तान से होती है, लेकिन मौजूदा हालात में वहां से सप्लाई प्रभावित होने की आशंका है। बाजार में अंजीर के दाम लगभग ₹100 प्रति किलो तक बढ़ने की खबर है। वहीं किशमिश की घरेलू आवक लगभग समाप्त हो चुकी है और आयात पर निर्भरता बढ़ गई है। ऐसे में आपूर्ति में कमी आने पर किशमिश भी महंगी हो सकती है।

अखरोट की कीमतें स्थिर

सभी सूखे मेवों में तेजी नहीं है। अखरोट की कीमतें फिलहाल स्थिर बनी हुई हैं। व्यापारियों के पास पर्याप्त भंडार मौजूद है, जिससे अगले एक-दो महीने तक बाजार में कमी की संभावना कम है। कश्मीर से आने वाली घरेलू आपूर्ति भी मांग को संतुलित बनाए हुए है, जिससे उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत है।

आयात शुल्क और समझौतों का प्रभाव

भारत में अखरोट पर 100 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाता है, जबकि अन्य सूखे मेवों पर 30 प्रतिशत से अधिक कर है। हालांकि अफगानिस्तान से आने वाले मेवों पर दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार समझौते के तहत शून्य शुल्क की सुविधा उपलब्ध है। लेकिन मौजूदा संकट और परिवहन बाधाओं के कारण इस रियायत का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।

उपभोक्ताओं की जेब पर असर

त्योहारों और शादी के सीजन में सूखे मेवों की मांग बढ़ जाती है। ऐसे समय में कीमतों में तेजी का सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होता है तो बाजार धीरे-धीरे सामान्य हो सकता है। फिलहाल पिस्ता, अंजीर और किशमिश की कीमतों में तेजी बने रहने की संभावना है, जबकि अखरोट कुछ समय तक स्थिर रह सकते हैं।

ये भी पढ़ें: ईरान युद्ध का असर: जेएनपीटी पर 4500 टन प्याज फंसा, किसान चिंतित

Exit mobile version