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मध्य प्रदेश: खरीफ फसल की बुआई घटी, सोयाबीन और कपास में गिरावट

भोपाल: मध्य प्रदेश खरीफ फसल की बुआई में गिरावट हुई है। देश के सबसे बड़े मक्का और तिल उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में इस खरीफ सीजन बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस बार राज्य में सामान्य से 23% अधिक बारिश दर्ज की गई है। जून में अच्छी वर्षा के बाद जुलाई में अत्यधिक बारिश के कारण बुआई का सही समय निकल गया। किसान नेताओं और कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इसका असर सीधे खरीफ फसलों की बुआई और उत्पादन पर पड़ा है।

कुल खरीफ फसल क्षेत्र में 1% की गिरावट

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस साल मध्य प्रदेश में खरीफ फसल क्षेत्र घटकर 139.87 लाख हेक्टेयर रह गया है, जबकि पिछले साल यह 141.32 लाख हेक्टेयर था। राज्य का सामान्य खरीफ फसल क्षेत्र 135.99 लाख हेक्टेयर है। इस क्षेत्र में सोयाबीन, धान और मक्का की हिस्सेदारी लगभग 75% है।

फसलवार बुआई की स्थिति

सोयाबीन: 5% की गिरावट के साथ 51.20 लाख हेक्टेयर।

धान (पैडी): मामूली कमी के साथ 36.20 लाख हेक्टेयर।

मक्का: 13.1% की बढ़ोतरी के साथ 23.50 लाख हेक्टेयर।

उड़द: 40.3% की बड़ी वृद्धि, 5.95 लाख हेक्टेयर।

मूंगफली: 36.9% की गिरावट, 4.03 लाख हेक्टेयर।

तिल (सेसमम): 31.2% की गिरावट, 2.27 लाख हेक्टेयर।

नाइगरसीड: बढ़कर 32,000 हेक्टेयर (पिछले साल 19,000 हेक्टेयर से)।

अरहर (तूर): 12% की बढ़ोतरी, 3.36 लाख हेक्टेयर।

मूंग: 22.1% की गिरावट, 0.95 लाख हेक्टेयर।

कपास: 10% की गिरावट, 5.56 लाख हेक्टेयर।

बाजरा और ज्वार: दोनों में कमी।

किसानों की रणनीति में बदलाव

किसानों ने कम कीमतों और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए सोयाबीन से हटकर मक्का और उड़द की ओर रुख किया है। उड़द जैसी कम अवधि की फसल (90 दिनों में तैयार) बारिश की वजह से अधिक बोई गई है।

उत्पादन में संभावित गिरावट

विशेषज्ञों का अनुमान है कि मक्का और धान को छोड़कर बाकी फसलों में उत्पादन घट सकता है। देर से बुआई और जलभराव के कारण पैदावार प्रभावित होगी।

राष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश की स्थिति (2024-25 खरीफ सीजन)

सोयाबीन, उड़द और नाइगर: दूसरा स्थान।

मूंगफली: तीसरा स्थान।

ज्वार, बाजरा: चौथा स्थान।

धान (चावल): पांचवां स्थान।

कपास, मूंग, तूर: छठा स्थान।

किसानों की चिंता

किसान नेता केदार सिरोही ने कहा कि इस बार सोयाबीन, कपास, बाजरा और ज्वार की बुआई 5% से 17% तक कम हुई है। ऐसे में सरकार को किसानों को समय पर सलाह और बाजार में उचित दाम दिलाने की व्यवस्था करनी चाहिए, ताकि वे नुकसान की भरपाई कर सकें।

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