चंडीगढ़: पंजाब में हाल ही में आई बाढ़ ने राज्यभर में किसानों की कमर तोड़ दी है। कई जिलों में धान की फसलें डूब गईं और किसानों को लाखों का नुकसान झेलना पड़ा। इसी बीच किसानों ने एक बार फिर फसल बीमा योजना (Crop Insurance Scheme) की मांग तेज कर दी है। उनका कहना है कि खेती लगातार जलवायु परिवर्तन की मार झेल रही है और सिर्फ मुआवजा देने से समस्या हल नहीं होगी। किसानों को स्थायी सुरक्षा देने के लिए फसल बीमा अनिवार्य किया जाना चाहिए।
किसानों ने बताया नुकसान ₹70,000 प्रति एकड़
पंजाब सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों को ₹20,000 प्रति एकड़ मुआवजा देने का ऐलान किया है। हालांकि, किसानों का कहना है कि यह मुआवजा नाकाफी है। कोहारा के किसान नेता हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि असल नुकसान करीब ₹70,000 प्रति एकड़ है। इसमें दोबारा बुवाई, जलभराव से मिट्टी की क्षति और फसल चक्र बिगड़ने जैसी समस्याएं शामिल हैं। लुधियाना जिले के किसान लखबीर सिंह ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने कहा कि इस बार सिर्फ फसल ही नहीं, बल्कि घर और पशुधन भी बर्बाद हुए हैं। उन्होंने मांग की कि सरकार कम से कम ₹50,000 प्रति एकड़ और प्रति पशु ₹1 लाख मुआवजा दे।
सिर्फ मुआवजा नहीं, चाहिए स्थायी सुरक्षा
किसान नेताओं का कहना है कि मौसम की मार अब लगातार बढ़ रही है। कभी आग, कभी सूखा, कभी बाढ़ – हर साल किसानों को नुकसान झेलना पड़ रहा है। इसीलिए सिर्फ मुआवजा नहीं, बल्कि फसल बीमा (Crop Insurance) अनिवार्य होना चाहिए। एसजीपीसी अध्यक्ष हरजिंदर सिंह धामी ने कहा कि बाढ़ से पंजाब के किसानों को भारी नुकसान हुआ है, लेकिन सरकार ने कोई ठोस सुरक्षा नहीं दी। उन्होंने फसल बीमा को अनिवार्य बनाने पर जोर देते हुए कहा कि किसानों को हर आपदा के बाद असहाय न छोड़ा जाए।
AAP सांसद और नेताओं का भी समर्थन
AAP सांसद मलविंदर कंग ने किसानों की मांग का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की मौजूदा योजना में कई खामियां हैं। बीमा का मकसद किसानों की मदद होना चाहिए, न कि बीमा कंपनियों का। अभी योजना के तहत तभी मुआवजा मिलता है जब किसी गांव का 70–80% हिस्सा प्रभावित हो, जबकि नुकसान व्यक्तिगत स्तर पर भी होता है।
क्यों जरूरी है फसल बीमा योजना?
पंजाब में 2022 में मार्च में अचानक तापमान बढ़ने से गेहूं की फसल को भारी नुकसान हुआ था।
इस साल जुलाई-अगस्त में मूसलाधार बारिश और बाढ़ से धान की फसल चौपट हो गई।
हर साल प्राकृतिक आपदाओं से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती है।
फसल बीमा से किसानों को आर्थिक सुरक्षा और फसल चक्र की स्थिरता मिलेगी।
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