कुरुक्षेत्र: हरियाणा के कुरुक्षेत्र में अखिल भारतीय किसान मजदूर मोर्चा की दो दिवसीय राष्ट्रीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें देशभर के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक में किसानों और मजदूरों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करते हुए आने वाले समय की रणनीति तय की गई।
देशव्यापी आंदोलन और जागरूकता अभियान की तैयारी
बैठक में गहन विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया कि केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में देशभर में व्यापक जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। खासतौर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने और किसानों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित आंदोलन खड़ा किया जाएगा।
कई अहम मुद्दों पर होगा संघर्ष
अखिल भारतीय किसान मजदूर मोर्चा की बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य ही नहीं, बल्कि ग्रामीण रोजगार योजना की सुरक्षा, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध, बिजली दरों, बीज कानून और नए श्रम कानूनों जैसे मुद्दों पर भी आवाज उठाई जाएगी। संगठन का मानना है कि ये सभी विषय किसानों और मजदूरों के हितों को सीधे प्रभावित करते हैं।
राज्यों में आयोजित होंगे सम्मेलन
संगठन ने निर्णय लिया कि विभिन्न राज्यों में सम्मेलन आयोजित कर किसानों और मजदूरों को इन मुद्दों के प्रति जागरूक किया जाएगा। इसी क्रम में राजस्थान में 28 अप्रैल को राज्य स्तरीय सम्मेलन होगा। इसके बाद मध्य प्रदेश में 30 और 31 मई को राष्ट्रीय बैठक आयोजित की जाएगी, जबकि 1 जून को क्षेत्रीय सम्मेलन किया जाएगा।
जनसमर्थन बढ़ाने पर जोर
संगठन का लक्ष्य है कि इन कार्यक्रमों के माध्यम से देशभर में व्यापक जनसमर्थन तैयार किया जाए, जिससे एक मजबूत आंदोलन खड़ा किया जा सके। प्रतिनिधियों ने कहा कि किसानों और मजदूरों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा और सरकार पर प्रभावी दबाव बनाया जाएगा।
एकता और संघर्ष का संकल्प
बैठक का समापन एकता और संघर्ष के संकल्प के साथ हुआ। सभी प्रतिनिधियों ने किसानों और मजदूरों के अधिकारों के लिए लगातार संघर्ष जारी रखने की बात कही। संगठन ने दोहराया कि यह लड़ाई पूरे देश के किसानों और मजदूरों की है।
प्रमुख नेताओं की रही मौजूदगी
बैठक में कई प्रमुख किसान नेता मौजूद रहे, जिन्होंने एकजुट होकर आंदोलन को मजबूत बनाने का आह्वान किया। सभी नेताओं ने किसानों और मजदूरों के हक की लड़ाई को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। कुल मिलाकर, यह बैठक आने वाले समय में बड़े किसान-मजदूर आंदोलन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
ये भी पढ़ें: होर्मुज संकट से बढ़ी खाद-कीटनाशक की कीमतें, किसान परेशान

