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होर्मुज संकट से बढ़ी खाद-कीटनाशक की कीमतें, किसान परेशान

Hormuz Crisis impact on Pesticide

नई दिल्ली: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब भारत तक पहुंचने लगा है। होर्मुज संकट उत्पन्न होने से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिसके चलते खाद और कीटनाशकों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। खरीफ मौसम से पहले बढ़ती लागत और कमी ने किसानों की चिंताएं बढ़ा दी हैं और फसल उत्पादन पर संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है।

आपूर्ति संकट से खेती की लागत में भारी इजाफा

मध्य प्रदेश सहित देश के कई हिस्सों में किसान खाद और कीटनाशकों की कमी से जूझ रहे हैं। बाजार में उर्वरकों की उपलब्धता घटने के साथ ही उनकी कीमतें कई गुना तक बढ़ गई हैं। सामान्य तौर पर सस्ता मिलने वाला यूरिया अब ऊंचे दामों पर बिक रहा है, जबकि डाई-अमोनियम फॉस्फेट जैसे उर्वरकों की कीमतों में भी तेज उछाल दर्ज किया गया है। किसानों का कहना है कि एक एकड़ खेती के लिए कई बोरे यूरिया की जरूरत होती है, ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी से उनकी लागत अचानक बहुत बढ़ गई है। इससे आने वाले मौसम में मुनाफे को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है।

आयात पर निर्भरता बनी बड़ी चुनौती

भारत उर्वरकों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। यूरिया और अन्य उर्वरकों की बड़ी मात्रा खाड़ी देशों से आती है, जहां उत्पादन प्राकृतिक गैस पर आधारित है। समुद्री मार्गों में बाधा और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण आपूर्ति धीमी हो गई है, जिससे देश में उपलब्धता और कीमत दोनों प्रभावित हुई हैं।

कीटनाशकों के दाम में तेज उछाल

होर्मुज संकट की वजह से सिर्फ खाद ही नहीं, कीटनाशकों की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। कच्चे माल की कमी और परिवहन लागत बढ़ने के कारण किसानों को पहले की तुलना में अधिक खर्च करना पड़ रहा है। जहां पहले प्रति एकड़ सीमित खर्च होता था, वहीं अब किसानों को ज्यादा रकम खर्च करनी पड़ रही है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ रहा है।

छोटे किसानों की बढ़ी मुश्किलें

छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण बन गई है। सीमित जमीन और संसाधनों के कारण बढ़ती लागत उनके मुनाफे को सीधे प्रभावित कर रही है। कई किसान अब फसल चयन और बुवाई को लेकर असमंजस में हैं, क्योंकि उन्हें लागत वसूलने का भरोसा नहीं है।

खरीफ फसलों पर मंडराया संकट

खरीफ मौसम में बोई जाने वाली प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, चावल, मक्का और दालें इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो सकती हैं। ये फसलें पहले से ही मानसून पर निर्भर रहती हैं, ऐसे में बढ़ती लागत और आपूर्ति की अनिश्चितता उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।

व्यापारियों ने जताई आपूर्ति घटने की चिंता

खाद व्यापारियों के अनुसार इस बार आपूर्ति सामान्य से काफी कम रही है। जहां पहले हजारों बोरे उपलब्ध होते थे, वहीं अब बहुत कम मात्रा में स्टॉक मिल रहा है। यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो आने वाले समय में उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है और खाद्य सुरक्षा पर भी दबाव बढ़ सकता है। कुल मिलाकर, वैश्विक तनाव का सीधा असर भारतीय कृषि पर दिखाई देने लगा है, जिससे किसानों की लागत, उत्पादन और आय तीनों पर दबाव बढ़ रहा है।

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