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मॉनसून सुस्त, खरीफ बुवाई 42 लाख हेक्टेयर घटी

Kharif Crop Sowing

नई दिल्ली, 20 जुलाई 2026: देश के अनेक हिस्सों में मॉनसून की रफ्तार कमजोर पड़ने का असर अब खरीफ फसलों की बुवाई पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के 17 जुलाई 2026 तक के ताजा आंकड़ों के अनुसार खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 42.28 लाख हेक्टेयर कम दर्ज किया गया है। वहीं, मौसम विभाग के वर्षा संबंधी आंकड़े भी संकेत दे रहे हैं कि देश के बड़े हिस्से में सामान्य से कम वर्षा होने के कारण किसानों की बुवाई प्रभावित हुई है। यदि आने वाले दिनों में अच्छी वर्षा नहीं होती है तो खरीफ उत्पादन पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।

खरीफ फसलों की बुवाई में बड़ी गिरावट

कृषि मंत्रालय के अनुसार 17 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई 658.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक यह आंकड़ा 700.47 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार कुल 42.28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कमी दर्ज की गई है। सबसे अधिक गिरावट दलहन, मोटे अनाज, तिलहन तथा कपास की बुवाई में देखने को मिली है। यह स्थिति कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है क्योंकि इन फसलों का उत्पादन देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के साथ-साथ खाद्य तेलों की उपलब्धता से भी जुड़ा हुआ है।

दलहन और तिलहन ने बढ़ाई चिंता

दलहनों की बुवाई पिछले वर्ष के 81.52 लाख हेक्टेयर से घटकर 69.23 लाख हेक्टेयर रह गई है। यानी कुल 12.29 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई है। वहीं मोटे अनाज का कुल क्षेत्रफल 15.06 लाख हेक्टेयर घटकर 119.03 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। तिलहन फसलों की बुवाई में भी 8.63 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है, जबकि कपास की बुवाई 5.87 लाख हेक्टेयर कम रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो आने वाले महीनों में उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

प्रमुख फसलों की स्थिति

फसलवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सोयाबीन की बुवाई 111.05 लाख हेक्टेयर से घटकर 106.02 लाख हेक्टेयर रह गई है। बाजरा 49.05 लाख हेक्टेयर से घटकर 39.98 लाख हेक्टेयर तथा मक्का 71.50 लाख हेक्टेयर से घटकर 67.89 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है। अरहर, मूंग और उड़द जैसी प्रमुख दलहनी फसलों का रकबा भी पिछले वर्ष की तुलना में कम दर्ज किया गया है। दूसरी ओर गन्ने की बुवाई में 0.86 लाख हेक्टेयर तथा जूट और मेस्टा की बुवाई में 0.13 लाख हेक्टेयर की मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

सोयाबीन, मूंगफली और कपास सबसे अधिक प्रभावित

विशेषज्ञों के अनुसार सोयाबीन, मूंगफली और कपास जैसी प्रमुख नकदी फसलों के रकबे में कमी चिंता का सबसे बड़ा कारण बन रही है। सोयाबीन की बुवाई में 5.02 लाख हेक्टेयर, मूंगफली में 3.17 लाख हेक्टेयर तथा कपास में 5.87 लाख हेक्टेयर की गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि गन्ने की बुवाई में कमी नहीं आई है, लेकिन इसमें हुई बढ़ोतरी केवल 0.86 लाख हेक्टेयर की रही है, जिसे बहुत अधिक उत्साहजनक नहीं माना जा रहा है।

देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा

भारतीय मौसम विभाग के उप-विभागीय वर्षा आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 19 जुलाई 2026 के दौरान देश के लगभग 65 प्रतिशत क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की गई है, जबकि केवल 35 प्रतिशत क्षेत्र में सामान्य वर्षा हुई है। कई कृषि प्रधान क्षेत्रों में पर्याप्त वर्षा नहीं होने के कारण किसान या तो बुवाई टाल रहे हैं या फिर कम क्षेत्र में खेती कर रहे हैं। इसका सीधा असर खरीफ फसलों के कुल रकबे पर दिखाई दे रहा है।

अगले कुछ सप्ताह होंगे निर्णायक

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में अच्छी वर्षा होती है तो बुवाई के आंकड़ों में सुधार संभव है। लेकिन यदि मॉनसून की कमजोरी लंबे समय तक बनी रहती है तो खरीफ उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है। विशेष रूप से सोयाबीन, दलहन, बाजरा तथा अन्य वर्षा आधारित फसलें सबसे अधिक प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में किसानों के साथ-साथ नीति निर्माताओं की निगाहें भी अब आने वाले सप्ताहों की मॉनसूनी गतिविधियों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही अवधि खरीफ फसलों के उत्पादन और कृषि क्षेत्र की दिशा तय करेगी।

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