लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार किसानों की आय में वृद्धि और उन्हें बेहतर आर्थिक सुरक्षा देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी कड़ी में राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जिसमें किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की वर्तमान प्रगति की गहन समीक्षा की गई। मंत्री ने स्पष्ट किया कि इन महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ हर पात्र किसान तक पहुंचना अनिवार्य है।
केसीसी से जुड़ेंगे पीएम किसान योजना के लाभार्थी
बैठक के दौरान कृषि मंत्री शाही ने निर्देश दिया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के मौजूदा डेटा का प्रभावी उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि इस डेटा की मदद से उन पात्र किसानों की पहचान की जाए जो अभी तक केसीसी से नहीं जुड़े हैं, ताकि उन्हें जल्द से जल्द इस सुविधा का लाभ मिल सके। विभागीय पोर्टलों पर ‘फार्मर आईडी’ का उपयोग कर योजनाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया।
एनपीए खातों के समाधान के लिए चलेगा संयुक्त अभियान
समीक्षा में यह बात सामने आई कि प्रदेश में बड़ी संख्या में केसीसी खातों का नवीनीकरण लंबित है और कई खाते एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) श्रेणी में आ चुके हैं। इस पर मंत्री ने सख्त निर्देश दिए:
- बैंक और कृषि विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर किसानों को समय पर ऋण अदायगी के लिए प्रेरित करें।
- लंबित खातों को नियमित करने की प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
- किसानों को जागरूक किया जाए कि समय पर भुगतान करने से उन्हें ब्याज दर में विशेष राहत मिलती है।
15 मई से नए केसीसी के लिए विशेष अभियान की शुरुआत
कृषि मंत्री ने घोषणा की कि आगामी 15 मई से पूरे प्रदेश में एक विशेष अभियान चलाया जाएगा। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य नए किसान क्रेडिट कार्ड जारी करना और अधिक से अधिक किसानों को बैंकिंग प्रणाली से जोड़ना है। उन्होंने बैंकों को आदेश दिया कि शाखा स्तर पर नोटिस बोर्ड लगाकर और किसानों से सीधा संपर्क कर जागरूकता बढ़ाई जाए।
फसल बीमा और कृषि निवेश में पारदर्शिता पर जोर
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की समीक्षा करते हुए सूर्य प्रताप शाही ने बैंकों और अधिकारियों को निर्देशित किया:
- जिन किसानों के खातों से प्रीमियम काटा जा चुका है, उनका बीमा अनिवार्य रूप से सुनिश्चित किया जाए।
- बीमा कवरेज और दावों का एक पारदर्शी रिकॉर्ड तैयार हो ताकि किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।
- एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (AIF) जैसी योजनाओं में बैंकों को सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाते हुए ऋण वितरण में देरी न करने की हिदायत दी गई।
अंत में, उन्होंने कहा कि योजनाओं की प्रगति की नियमित निगरानी की जाएगी ताकि जमीनी स्तर पर आने वाली समस्याओं का तत्काल समाधान हो सके और किसानों को सरकारी अनुदान व ब्याज छूट का पूरा लाभ मिले।
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