सोनीपत: देशभर के किसान एक बार फिर अपनी मांगों को लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। गैर राजनीतिक संयुक्त किसान मोर्चा ने ऐलान किया है कि 7 फरवरी से किसानों की यात्रा कन्याकुमारी से कश्मीर तक शुरू होगी। इसके साथ ही 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में एक विशाल किसान महापंचायत आयोजित की जाएगी। इस अभियान में सभी किसान संगठनों के शामिल होने की सहमति बनी है और किसानों से बड़ी संख्या में जुड़ने की अपील की गई है।
किसानों की समस्याओं और मांगों पर फोकस
सोनीपत में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में किसान नेताओं ने कहा कि देश में किसानों की आत्महत्याओं का मामला गंभीर रूप ले चुका है और अब इसके खिलाफ निर्णायक लड़ाई जरूरी हो गई है। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए बजट में किसानों के लिए कोई ठोस राहत नहीं दी गई। न तो कर्ज माफी का प्रावधान किया गया और न ही आय बढ़ाने को लेकर कोई ठोस योजना सामने आई।
7 फरवरी से शुरू होगा अभियान
किसान नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि 7 फरवरी से कन्याकुमारी से कश्मीर तक यात्रा की शुरुआत होगी। इसके साथ-साथ हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा। किसान नेता गांव-गांव जाकर किसानों से संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं व मांगों को एक साझा मंच पर लाने का काम करेंगे।
19 मार्च को दिल्ली में किसान महापंचायत
डल्लेवाल ने कहा कि 19 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली किसान महापंचायत में एमएसपी पर गारंटी कानून, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू कराने, किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी, बिजली-पानी से जुड़े मुद्दों सहित अन्य मांगों को मजबूती से उठाया जाएगा।
बजट और सरकार की नीतियों की आलोचना
किसान नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार का बजट किसानों के हित में नहीं है। बिना विशेष बजट प्रावधान के किसानों की कर्ज माफी संभव नहीं है। उनका कहना है कि यदि सरकार ने समय रहते कदम नहीं उठाए तो किसानों की आत्महत्या की घटनाएं नहीं रुकेंगी।
राजनीतिक पार्टियों पर लगाए आरोप
संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं ने कहा कि एसवाईएल नहर का मुद्दा हरियाणा और पंजाब की राजनीति का शिकार बन चुका है। चुनाव के समय अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नारे लगाए जाते हैं, लेकिन किसानों की समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जाता। साथ ही शारदा-यमुना लिंक नहर जैसे मुद्दों पर भी गंभीर चर्चा की मांग की गई। किसान संगठनों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन अपनी मांगों को लेकर किसान सरकार के सामने पूरी मजबूती से खड़े रहेंगे।
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