नई दिल्ली: बाढ़ और बरसात का मौसम भले ही कुछ समय बाद समाप्त हो जाए, लेकिन इसके बाद फैलने वाला संक्रमण पशुओं के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर सकता है। गंदगी और दूषित वातावरण के कारण एक पशु में हुआ संक्रमण दूसरे पशुओं तक तेजी से फैल सकता है। कई परिस्थितियों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए बाढ़ और बरसात के दौरान ही नहीं, बल्कि इसके बाद भी पशुशाला की साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
पशु विशेषज्ञों के अनुसार पशुशाला में जमा गोबर, गंदा पानी और अन्य कचरा संक्रमण फैलाने वाले जीवाणुओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकता है। नियमित सफाई से पशुओं को बीमारियों से बचाने में मदद मिलती है। साथ ही डेयरी फार्म में स्वच्छता बनाए रखने से दूध के दूषित होने का खतरा भी कम किया जा सकता है। भारतीय खाद्य संरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की ओर से भी खाद्य और डेयरी से जुड़े प्रतिष्ठानों में स्वच्छता बनाए रखने पर जोर दिया जाता है। इसलिए पशुशाला की नियमित सफाई पशुओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ दूध की गुणवत्ता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
पशुशाला की सफाई के लिए अपनाएं ये तरीके
डेयरी फार्म में रोजाना सफाई की उचित व्यवस्था रखना जरूरी है। इसके लिए पर्याप्त पानी और सफाई के उपकरण उपलब्ध होने चाहिए। पशुशाला में जमा गोबर और दूसरे कचरे को लंबे समय तक पड़ा नहीं रहने देना चाहिए। पानी की तेज धार वाली नली की मदद से फर्श पर जमा गोबर और दूसरे कचरे को बहाया जा सकता है। इसके बाद ठोस कचरे को फावड़े की मदद से इकट्ठा करके ठेला गाड़ी से पशुशाला के बाहर ले जाना चाहिए। बड़ी पशुशालाओं में इसके लिए बैलगाड़ी या ट्रैक्टर-ट्रॉली का इस्तेमाल किया जा सकता है।
नालियों की सही व्यवस्था भी जरूरी
पशुशाला से निकलने वाले तरल गोबर और धुलाई के पानी के लिए उचित नाली व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। पशुशाला की नालियों में पर्याप्त ढलान रखा जाना चाहिए, ताकि पानी और तरल अपशिष्ट आसानी से बाहर निकल सके। नाली को यू आकार में बनाया जा सकता है। इसकी गहराई करीब 6 से 8 सेंटीमीटर और चौड़ाई 30 से 40 सेंटीमीटर तक रखी जा सकती है। बड़े पशुशालाओं में अलग-अलग हिस्सों की नालियों को एक मुख्य नाली से जोड़ने की व्यवस्था की जानी चाहिए। पशुशाला से निकलने वाले तरल अपशिष्ट को निरीक्षण कक्ष और बैठने वाले कक्ष के माध्यम से तरल खाद भंडारण टैंक तक पहुंचाया जा सकता है। इससे पशुशाला के आसपास गंदा पानी जमा होने और संक्रमण बढ़ने की आशंका कम की जा सकती है।
गोबर और धोवन पानी का सही इस्तेमाल करें
पर्याप्त पानी उपलब्ध होने पर पशुशाला के फर्श को दबाव के साथ धोकर ठोस और तरल खाद को निर्धारित स्थान तक पहुंचाया जा सकता है। पशुशाला से निकलने वाले मिश्रित धोवन पानी को सीधे चारा घास वाले खेतों तक पहुंचाया जा सकता है या जैव गैस संयंत्र में घोल के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, अपशिष्ट के उपयोग और निपटान की व्यवस्था स्थानीय नियमों और उचित कृषि प्रबंधन के अनुसार ही करनी चाहिए।
ठोस खाद को अलग रखकर करें भंडारण
पशुशाला से निकलने वाली ठोस खाद को अलग से इकट्ठा करके खाद के गड्ढे या निर्धारित भंडारण स्थान में रखना चाहिए। इसे खुले में बिखरा छोड़ने से मक्खियों और दूसरे संक्रमण फैलाने वाले जीवों की संख्या बढ़ सकती है। उचित तरीके से खाद का भंडारण और अपघटन करने से जैविक खाद तैयार की जा सकती है। इससे एक ओर पशुशाला में स्वच्छता बनी रहती है, वहीं दूसरी ओर खाद का उपयोग खेतों में भी किया जा सकता है।
बाढ़ के बाद सफाई में लापरवाही न करें
बाढ़ और लगातार बारिश के बाद पशुशाला में नमी, गंदगी और दूषित पानी लंबे समय तक रह सकता है। ऐसे वातावरण में संक्रमण फैलने की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए बाढ़ का पानी उतरने के बाद पशुशाला के फर्श, नालियों और आसपास के क्षेत्र की अच्छी तरह सफाई करना जरूरी है। पशुओं के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी भी करनी चाहिए। किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर उसे बाकी पशुओं से अलग रखने और पशु चिकित्सक से सलाह लेने की जरूरत होती है। स्वच्छ पशुशाला से संक्रमण का खतरा कम करने, पशुओं को स्वस्थ रखने और दूध को दूषित होने से बचाने में मदद मिल सकती है। इसलिए बाढ़-बरसात के मौसम में पशुपालकों के लिए सफाई को रोजाना की प्राथमिकता बनाना बेहद जरूरी है।
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