करनाल, 04 अगस्त 2026: भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान, करनाल ने किसानों के लिए गेहूं की नई उन्नत किस्म डीबीडब्ल्यू 425 विकसित की है। यह किस्म विशेष रूप से केंद्रीय क्षेत्र में देर से बुवाई करने वाले सिंचित किसानों के लिए तैयार की गई है। संस्थान का दावा है कि यह किस्म बदलती जलवायु परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम है। गर्मी और सूखे जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों को सहन करने की क्षमता होने के कारण यह आने वाले समय में किसानों के लिए लाभदायक विकल्प साबित हो सकती है।
जलवायु परिवर्तन के बीच किसानों के लिए नई उम्मीद
भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान के अनुसार डीबीडब्ल्यू 425 को जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। इस किस्म में गर्मी और सूखे को सहन करने की विशेष क्षमता है, जिससे प्रतिकूल मौसम में भी उत्पादन स्थिर रहने की संभावना रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बदलते मौसम के बीच ऐसी किस्में किसानों की आय सुरक्षित रखने के साथ-साथ देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
उपज और गुणवत्ता दोनों में बेहतर
संस्थान के अनुसार डीबीडब्ल्यू 425 की औसत उपज 47.9 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसके दानों में लगभग 12.3 प्रतिशत प्रोटीन पाया जाता है, जिससे इसका पोषण मूल्य बेहतर माना जा रहा है। बेहतर दाना गुणवत्ता के कारण यह किस्म केवल किसानों के लिए ही नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के लिए भी उपयोगी मानी जा रही है।
कम पानी में अच्छी पैदावार देने वाली अन्य किस्में
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली गेहूं की अन्य प्रमुख किस्मों में डीबीडब्ल्यू 359, सीजी 1040 और सीजी 1036 शामिल हैं। इसके अलावा एचआई 1683 नामक एक नई गेहूं किस्म पर भी कार्य जारी है, जिसे अभी जारी नहीं किया गया है। भविष्य में इसके भी किसानों के लिए उपलब्ध होने की संभावना है।
एचडी 3388 भी किसानों के लिए बेहतर विकल्प
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा विकसित एचडी 3388 गेहूं की एक उन्नत किस्म है, जो समय पर बुवाई और सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त मानी जाती है। यह किस्म लगभग 125 दिनों में तैयार हो जाती है और इसकी औसत उत्पादन क्षमता 52 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। इसमें अधिक तापमान और गर्मी के तनाव को सहन करने की अच्छी क्षमता है। इस किस्म के गेहूं से बनी रोटी की गुणवत्ता भी बेहतर मानी जाती है।
इन राज्यों के किसानों के लिए अनुशंसित
कृषि वैज्ञानिकों ने एचडी 3388 किस्म को मुख्य रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल के मैदानी क्षेत्र, ओडिशा और असम के किसानों के लिए उपयुक्त बताया है। जो किसान इस किस्म का बीज प्राप्त करना चाहते हैं, वे भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली से संपर्क कर सकते हैं।
नई किस्मों से बढ़ेगी उत्पादकता
विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसी उन्नत और मौसम सहनशील गेहूं किस्मों का विकास कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इससे किसानों को प्रतिकूल मौसम में भी बेहतर उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ेगी, उत्पादन लागत कम करने में मदद मिलेगी और देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूती मिलेगी।
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