Site icon Agriculture| Kheti| Krishi| Farm| Farmer| Agriculture| News

होर्मुज संकट से खाद की किल्लत, खेती और खाद्य सुरक्षा पर खतरा

Hormuz Crisis

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग बाधित होने से वैश्विक स्तर पर एक नया संकट खड़ा हो गया है। तेल की कीमतों में तेज उछाल के साथ अब खाद की आपूर्ति पर भी बड़ा असर देखने को मिल रहा है, जिससे कृषि उत्पादन और खाद्य सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

खाद की कमी का बढ़ता खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया में व्यापार होने वाली यूरिया का लगभग आधा हिस्सा खाड़ी देशों से इसी मार्ग के जरिए निर्यात होता है। ऐसे में इस रास्ते में रुकावट आने से खाद की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा है। प्राकृतिक गैस की कमी के कारण कई खाद कारखानों को उत्पादन घटाना या बंद करना पड़ा है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है।

उत्पादन घटने से बढ़ीं कीमतें

होर्मुज क्षेत्र में गैस आपूर्ति बाधित होने के बाद कई बड़े संयंत्रों में उत्पादन रुक गया है। इसका असर यह हुआ कि यूरिया की कीमतों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। हाल के दिनों में कीमतें तेजी से बढ़कर काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक हैं। इससे किसानों के लिए खेती की लागत बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।

एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा असर

एशियाई देश खाद आपूर्ति के लिए खाड़ी क्षेत्र पर काफी निर्भर हैं। भारत सहित कई बड़े कृषि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करते हैं। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने से इन देशों की कृषि व्यवस्था पर गहरा असर पड़ सकता है।

बुवाई के समय आई चुनौती

यह संकट ऐसे समय आया है जब कई देशों में बुवाई का मौसम चल रहा है। किसानों के लिए इस समय खाद की उपलब्धता बेहद जरूरी होती है। यदि समय पर खाद नहीं मिलती, तो फसलों की पैदावार पर सीधा असर पड़ता है और उत्पादन घट सकता है।

खाद्य सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो वैश्विक खाद्य उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। बड़े कृषि उत्पादक देश भी प्रभावित होंगे, जिससे खाद्य आपूर्ति में कमी और कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है।

किसानों के सामने बढ़ती चुनौती

खाद की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। कुछ किसान लागत बढ़ने के कारण खाद का उपयोग कम कर सकते हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित होगा। आने वाले समय में इसका असर बाजार और आम उपभोक्ताओं पर भी देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर होर्मुज क्षेत्र में पैदा हुआ यह संकट केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका प्रभाव कृषि और खाद्य सुरक्षा पर भी गहराता जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि इस समस्या का समाधान कब और कैसे निकलेगा।

ये भी पढ़ें: एमएसपी और सरकारी योजनाओं से किसानों की आय बढ़ी, बोले शिवराज

Exit mobile version