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गर्मी में दुधारू पशुओं की देखभाल, पानी की कमी से बचाव जरूरी

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नई दिल्ली: उत्तर भारत के कई राज्यों में पड़ रही भीषण गर्मी का असर अब दुधारू पशुओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में तापमान 45 डिग्री के पार पहुंच चुका है, जबकि गाय और भैंस के लिए 30 से 35 डिग्री से ऊपर का तापमान नुकसानदायक माना जाता है। ऐसे में पशु गर्मी की लहर की चपेट में आकर कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिनमें सबसे बड़ी समस्या शरीर में पानी की कमी की है।

पानी की कमी से घटता है दूध उत्पादन

विशेषज्ञों के अनुसार पशुओं के शरीर में पानी की कमी होने से उनका दूध उत्पादन सीधे प्रभावित होता है। पानी की कमी से शरीर के कई जरूरी कार्य प्रभावित होते हैं, जिससे पशु कमजोर होने लगता है और उसकी उत्पादक क्षमता घट जाती है। यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो पशु बीमार भी पड़ सकता है।

इन लक्षणों से पहचानें समस्या

पशुओं में पानी की कमी को कई लक्षणों के आधार पर पहचाना जा सकता है। जैसे भूख कम लगना, सुस्ती आना, शरीर का कमजोर होना, पेशाब का गाढ़ा होना और वजन घटना। इसके अलावा आंखों का सूखना, चमड़ी का खुरदरी होना और दूध उत्पादन में कमी भी इसके प्रमुख संकेत हैं। एक महत्वपूर्ण पहचान यह भी है कि यदि पशु की चमड़ी को उंगलियों से पकड़कर ऊपर उठाया जाए और वह देर से अपनी जगह पर लौटे, तो यह पानी की कमी का संकेत होता है।

पानी की कमी से बढ़ती हैं बीमारियां

जब पशुओं को पर्याप्त पानी नहीं मिलता, तो उनके शरीर पर कई तरह के नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। चारा खाने और पचाने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे पोषक तत्व शरीर में नहीं टिक पाते और बाहर निकल जाते हैं। खून गाढ़ा होने लगता है और प्रजनन क्षमता भी प्रभावित होती है। छोटे पशुओं में पेचिस और बड़े पशुओं में दस्त जैसी समस्याएं भी बढ़ने लगती हैं।

बचाव के लिए जरूरी उपाय

गर्मी के मौसम में पशुओं को साफ और ताजा पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है। समय-समय पर पानी पिलाने और उनके रहने की जगह को ठंडा रखने से इन समस्याओं से बचा जा सकता है। सही देखभाल और प्रबंधन से न केवल पशुओं को बीमार होने से बचाया जा सकता है, बल्कि दूध उत्पादन को भी बनाए रखा जा सकता है।

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