Site icon Agriculture| Kheti| Krishi| Farm| Farmer| Agriculture| News

मक्का के गिरते भाव से किसानों की बढ़ी चिंता

falling corn prices

नई दिल्ली: देशभर की मंडियों में पिछले कई महीनों से मक्का के गिरते भाव किसानों के लिए बड़ी चिंता का कारण बने हुए हैं। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सत्र 2026-27 के लिए मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य मात्र 10 रुपये बढ़ाकर 2410 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, लेकिन बाजार में किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जमीनी स्थिति यह है कि अधिकांश राज्यों में मक्का के भाव अभी भी समर्थन मूल्य से काफी नीचे चल रहे हैं, जिससे किसानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है।

मंडियों में समर्थन मूल्य से नीचे बिक रहा मक्का

मई 2026 की राज्यवार थोक मूल्य रिपोर्ट के अनुसार देश में मक्का का औसत भाव करीब 2007 रुपये प्रति क्विंटल रहा, जो समर्थन मूल्य से लगभग 400 रुपये कम है। मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में भी कीमतें 1800 से 1900 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बनी हुई हैं। ऐसी स्थिति में किसानों को अपनी उपज बेचने पर घाटा उठाना पड़ रहा है।

मासिक स्तर पर हल्की तेजी, लेकिन राहत नहीं

हालांकि मई महीने में कुछ राज्यों में कीमतों में हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राजस्थान में करीब 12.7 प्रतिशत, मध्य प्रदेश में 12.3 प्रतिशत और दिल्ली में 30 प्रतिशत से अधिक तेजी देखी गई है। इसके अलावा महाराष्ट्र, गुजरात और आंध्र प्रदेश में भी भाव में कुछ सुधार हुआ है। इसके बावजूद किसानों का कहना है कि जब तक कीमतें समर्थन मूल्य तक नहीं पहुंचतीं, तब तक उन्हें वास्तविक राहत नहीं मिल सकती।

बढ़ती लागत से और गहरा संकट

किसानों के अनुसार बीज, खाद, सिंचाई और मजदूरी की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि फसल के दाम अपेक्षाकृत कम बने हुए हैं। सालाना आधार पर भी कई राज्यों में मक्का के भाव कमजोर बने हुए हैं। आंध्र प्रदेश और उत्तर प्रदेश में कीमतें पिछले वर्ष की तुलना में 21 प्रतिशत से अधिक नीचे हैं, जबकि तमिलनाडु में लगभग 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

सरकारी खरीद की कमी से बढ़ा नुकसान

किसानों का कहना है कि समर्थन मूल्य का फायदा तभी मिल सकता है जब सरकार बड़े स्तर पर खरीद सुनिश्चित करे और बाजार भाव को समर्थन मूल्य के करीब लाया जाए। फिलहाल खुले बाजार में फसल बेचने पर किसानों को घाटा उठाना पड़ रहा है। हालांकि कुछ राज्यों में सरकारी खरीद के जरिए सीमित राहत दी जा रही है।

खरीफ बुवाई पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले वर्ष मक्का का समर्थन मूल्य 2400 रुपये प्रति क्विंटल तय होने के बाद किसानों ने बड़े पैमाने पर इसकी खेती की थी, खासकर तब जब अन्य फसलों के दाम कमजोर थे। लेकिन नई फसल आने के बाद मक्का के भाव गिर गए, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। इस वर्ष समर्थन मूल्य में केवल मामूली बढ़ोतरी होने के कारण संभावना है कि किसान मक्का की खेती से दूरी बना सकते हैं और इसका रकबा घट सकता है। इसके अलावा मौसम की स्थिति भी इसमें अहम भूमिका निभा सकती है। यदि मानसून की शुरुआत कमजोर रहती है तो किसान कम पानी में उगने वाली फसलों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे मक्का की बुवाई पर असर पड़ना तय माना जा रहा है।

ये भी पढ़ें: पेट्रोल और डीजल महंगा, लागत बढ़ने से किसान चिंतित

Exit mobile version