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हरियाणा में किसान MSP से कम में धान की फसल बेचने को मजबूर

हरियाणा में किसान

चंडीगढ़। हरियाणा में खरीफ सीजन शुरू हुए दो हफ्ते बीत चुके हैं, लेकिन राज्य के किसानों की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। मंडियों में सरकारी खरीद प्रक्रिया लगभग ठप पड़ी है। इससे हरियाणा में किसान अपनी फसल न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी कम दरों पर निजी व्यापारियों को बेचनी पड़ रही है।

हरियाणा में किसान MSP से कम में फसल बिक्री को मजबूर

करनाल की नई अनाज मंडी में 62 वर्षीय किसान कंवर पाल रविवार सुबह से ही अपने धान की बिक्री का इंतजार कर रहे थे। उन्होंने बताया, “मैंने 10 में से सिर्फ 5 एकड़ की फसल काटी है, बाकी बारिश की चेतावनी के कारण रोक रखी है। मंडी में सरकारी खरीद नहीं हो रही और निजी व्यापारी ₹1,800 प्रति क्विंटल दे रहे हैं जबकि MSP ₹2,369 तय है। यह सरासर अन्याय है।” इसी तरह किसान मान सिंह ने बताया कि यह उनका तीसरा दिन है, लेकिन अभी तक कोई सरकारी खरीद एजेंसी मंडी में नहीं पहुंची है।

किसान परेशान, बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें

राज्य के कई जिलों यमुनानगर, सिरसा, अंबाला, कैथल और नारनौल में 5 से 7 अक्टूबर के बीच हुई बारिश ने किसानों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। मंडियों में खुले में रखा धान अब भीगने से खराब होने की कगार पर है। किसानों को अनाज बचाने के लिए हाथों से समेटते और ढकते देखा गया।

कमीशन एजेंटों और किसान संगठनों ने सरकार पर लापरवाही और देरी के आरोप लगाए हैं। स्थानीय एजेंट पवन कुमार ने बताया कि “मिलर्स की भागीदारी तय न होने से खरीद प्रक्रिया प्रभावित है।” वहीं भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रवक्ता बहादुर महला ने कहा कि सरकार जानबूझकर मिलर्स की भागीदारी रोक रही है ताकि MSP पर खरीद से बचा जा सके। उन्होंने कहा, “डिजिटल कांटे अब तक नहीं लगाए गए हैं। नमी के बहाने किसानों को ₹500-600 प्रति क्विंटल कम पर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है।”

प्रशासन का दावा: दो दिन में सुधरेगी स्थिति

हालांकि, बाजार समिति की सचिव आशा रानी ने दावा किया कि सरकारी खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है। उन्होंने कहा, “डिजिटल कांटे दो दिन में लग जाएंगे, और तब खरीद में तेजी आएगी।”

सरकार का बयान: ₹1,014 करोड़ किसानों के खातों में भेजे

राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि अब तक ₹1,014.19 करोड़ रुपये किसानों के बैंक खातों में MSP भुगतान के रूप में भेजे जा चुके हैं। कुल 81,410 किसानों ने पारदर्शी प्रक्रिया के तहत अपनी फसल बेची है। उन्होंने कहा, “हरियाणा सरकार ने समय पर भुगतान सुनिश्चित किया है और किसानों को किसी प्रकार की दिक्कत न हो, इसके लिए सभी मंडियों में निगरानी रखी जा रही है।”

किसान संगठनों का प्रदर्शन, हाईवे पर लगी लंबी कतारें

रविवार को भारतीय किसान यूनियन (BKU) के प्रदेश अध्यक्ष रतन मान के नेतृत्व में किसानों ने करनाल मंडी के मुख्य द्वार पर धरना दिया। इस दौरान नेशनल हाईवे-44 पर ट्रैक्टर-ट्रेलरों की लंबी कतारें लग गईं। धरना स्थल पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और JJP अध्यक्ष अजय चौटाला भी पहुंचे और किसानों का समर्थन किया।

किसानों का दर्द: बारिश और देरी ने बढ़ाया आर्थिक संकट

अंबाला और यमुनानगर के किसानों ने बताया कि वे पहले से ही भारी मॉनसूनी बारिश और कम उपज से जूझ रहे हैं। अब सरकारी खरीद में देरी और MSP से कम कीमत मिलने के कारण उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।

निष्कर्ष: किसानों में बढ़ती नाराजगी, सरकार के लिए चुनौती

हरियाणा में धान की खरीद प्रक्रिया में देरी और MSP से कम दामों पर बिक्री को लेकर किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। यदि जल्द ही खरीद प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो राज्य सरकार को किसानों के बड़े आंदोलन का सामना करना पड़ सकता है।

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