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सर्दियों में मुर्गी पालन पर मंडराता खतरा, बचाव से ही होगा नुकसान कम

मुर्गी पालन

लखनऊ: सर्दियों में मुर्गी पालन का व्यवसाय अतिरिक्त देखभाल की मांग करता है। इस मौसम में मुर्गी पालकों को अपने पोल्ट्री फार्म पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है। कृषि विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों के अनुसार, ठंड का मौसम मुर्गियों के लिए सबसे संवेदनशील होता है। इस दौरान ज़रा सी लापरवाही न केवल एक चूजे की जान ले सकती है, बल्कि पूरे पोल्ट्री फार्म को भारी नुकसान पहुंचा सकती है। इस मौसम में मुर्गियों में वायरल, बैक्टीरियल, फंगल, परजीवी और पोषण संबंधी बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों की चेतावनी, पांच प्रमुख बीमारियों से रहें सावधान

पोल्ट्री विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सर्दियों में मुर्गियों में पांच प्रमुख प्रकार के रोग देखे जाते हैं। अगर समय पर बचाव न किया गया तो यह बीमारियां किसानों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकती हैं।

मुर्गियों में पाए जाने वाले रोगों के प्रकार

मुर्गियों में सामान्यतः पांच प्रकार की बीमारियां पाई जाती हैं:
वायरल रोग: रानीखेत, गम्बोरों, फाउल पॉक्स आदि।
बैक्टीरियल रोग: पुलोरम, फाउल टायफाइड, कोलिबैसिलॉसिस आदि।
परजीवी रोग: कोक्सिडियोसिस, कीड़े लगना आदि।
फंगल रोग: एस्परजिलोसिस (Aspergillosis)।
पोषण संबंधी रोग: विटामिन या खनिज तत्वों की कमी से उत्पन्न।

1. एस्परजिलोसिस (Fungal Disease)

लक्षण: मुर्गियों को सांस लेने में दिक्कत, छींक आना और अचानक मृत्यु होना।
उपचार: कॉपर सल्फेट या पोटैशियम परमैंगनेट का धुआं करना प्रभावी रहता है।
बचाव: गीले या फफूंदी लगे दाने न खिलाएं और पोल्ट्री हाउस को सूखा रखें।

2. फाउल टायफाइड (Bacterial Disease)

लक्षण: मुर्गियों में सुस्ती, भूख की कमी और अंडा उत्पादन में गिरावट।
उपचार: पशु चिकित्सक की सलाह से Ciprofloxacin या Enrofloxacin दवाएं दी जा सकती हैं।
बचाव: फार्म में सफाई बनाए रखें और चूहों, मच्छरों जैसे संक्रमण वाहकों से बचाव करें।

3. पुलोरम रोग (Bacterial Disease in Chicks)

लक्षण: चूजों में सफेद दस्त, पंखों का बिखरना और अचानक मृत्यु।
उपचार: Furazolidone, Enrofloxacin, Sulpha दवाएं दी जा सकती हैं (केवल चिकित्सक की सलाह पर)।
बचाव: बीमार चूजों को तुरंत अलग करें और केवल “Pullorum-tested” चूजे ही खरीदें।

4. रानीखेत रोग (Viral Disease)

लक्षण: गर्दन का टेढ़ा होना, हरा दस्त, चोंच से झाग निकलना और अचानक मृत्यु।
उपचार: इसका कोई विशेष इलाज नहीं है, लेकिन मल्टीविटामिन और इलेक्ट्रोलाइट से कुछ राहत मिलती है।
बचाव: चूजों का टीकाकरण 7वें दिन से शुरू करें और समय-समय पर दोहराते रहें।

5. गम्बोरों रोग (Viral Disease)

लक्षण: सिर और गर्दन टेढ़ी होना, हरा पतला दस्त, अंडा उत्पादन में कमी और अचानक मृत्यु।
उपचार: इसका कोई इलाज नहीं है, लेकिन इलेक्ट्रोलाइट और मल्टीविटामिन देने से राहत मिलती है।
बचाव: टीकाकरण 7वें दिन से शुरू कर समय-समय पर दोहराएं।

जागरूकता और टीकाकरण ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय

सर्दियों में पोल्ट्री फार्म चलाने वाले किसानों के लिए सावधानी और जागरूकता सबसे बड़ा बचाव है। समय पर टीकाकरण, साफ-सफाई और चिकित्सकीय परामर्श से न केवल मुर्गियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है बल्कि आर्थिक नुकसान से भी बचा जा सकता है। पशु चिकित्सक की सलाह के बिना कोई दवा न दें और फार्म की स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता दें।

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