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प्याज की पांच नई क़िस्मों की सिफारिश, किसानों को मिलेगा ज्यादा उत्पादन

onion farmers

कल्याणी: डायरेक्टोरेट ऑफ ऑनियन एंड गार्लिक रिसर्च (DOGR) द्वारा विकसित प्याज की पांच नई और उन्नत किस्मों को देशभर के किसानों के लिए जारी करने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। इन किस्मों को बिधान चंद्र कृषि विश्वविद्यालय (BCKV), कल्याणी में आयोजित राष्ट्रीय वर्कशॉप में मंजूरी के लिए आगे बढ़ाया गया। यह वर्कशॉप ऑल इंडिया नेटवर्क रिसर्च प्रोजेक्ट ऑन ऑनियन एंड गार्लिक (AINRPOG) के तहत आयोजित की गई थी।

राष्ट्रीय वर्कशॉप में विशेषज्ञों की समीक्षा

वर्कशॉप के दौरान विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने इन नई किस्मों की उपज, गुणवत्ता और अलग-अलग मौसम में प्रदर्शन की गहन समीक्षा की। विशेषज्ञों ने पाया कि ये किस्में अधिक पैदावार देने के साथ-साथ बेहतर गुणवत्ता और मौसम के अनुसार अनुकूलन की क्षमता रखती हैं। इसके बाद इन्हें किसानों के लिए देशभर में जारी करने की सिफारिश की गई।

भीमा सुपर किस्म की विशेषताएं

‘भीमा सुपर’ DOGR की एक लाल प्याज किस्म है, जिसे छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु में खरीफ मौसम के लिए पहचाना गया है। यह लेट खरीफ में भी उगाई जा सकती है। खरीफ में इसकी औसत उपज 20-22 टन प्रति हेक्टेयर और लेट खरीफ में 40-45 टन प्रति हेक्टेयर है। यह खरीफ में 100-105 दिन और लेट खरीफ में 110-120 दिन में पक जाती है। इसमें अधिकतर सिंगल सेंटर वाले बल्ब बनते हैं।

भीमा डार्क रेड की पहचान

‘भीमा डार्क रेड’ किस्म को भी छत्तीसगढ़, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु में खरीफ मौसम के लिए सिफारिश किया गया है। इसकी औसत बाजार योग्य उपज 20-22 टन प्रति हेक्टेयर है। गहरे लाल रंग के आकर्षक, चपटे-गोल बल्ब इसकी खास पहचान हैं। यह किस्म 95-100 दिनों में तैयार हो जाती है।

भीमा रेड खरीफ से रबी तक उपयोगी

‘भीमा रेड’ पहले से महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में रबी मौसम के लिए अनुशंसित है। अब इसे दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु में खरीफ मौसम के लिए भी जारी करने की सिफारिश की गई है। यह किस्म लेट खरीफ में भी उगाई जा सकती है। खरीफ में इसकी औसत उपज 19-21 टन प्रति हेक्टेयर, लेट खरीफ में 48-52 टन और रबी में 30-32 टन प्रति हेक्टेयर है। रबी मौसम में इसे करीब तीन महीने तक स्टोर किया जा सकता है।

भीमा श्वेता सफेद प्याज की उन्नत किस्म

‘भीमा श्वेता’ सफेद प्याज की किस्म है, जो पहले से रबी के लिए अनुशंसित है। अब इसे छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तमिलनाडु में खरीफ मौसम के लिए भी रिकमेंड किया गया है। इसका TSS लगभग 11-12 डिग्री ब्रिक्स है। यह 110-120 दिनों में पकती है और मध्यम स्टोरेज क्षमता के साथ तीन महीने तक रखी जा सकती है। खरीफ में इसकी औसत उपज 18-20 टन और रबी में 26-30 टन प्रति हेक्टेयर है।

भीमा शुभ्रा की मौसम सहनशील क्षमता

‘भीमा शुभ्रा’ सफेद प्याज की एक और उन्नत किस्म है, जिसे छत्तीसगढ़, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा, राजस्थान और तमिलनाडु में खरीफ के लिए अनुशंसित किया गया है। महाराष्ट्र में इसे लेट खरीफ के लिए भी सिफारिश की गई है। यह खरीफ में 110-115 दिन और लेट खरीफ में 120-130 दिन में पकती है। इसका TSS 10-12 डिग्री ब्रिक्स है। यह किस्म मौसम के उतार-चढ़ाव को सहन करने में सक्षम है और मध्यम स्टोरेज वाली मानी जाती है।

किसानों को मिलेगा सीधा फायदा

विशेषज्ञों के अनुसार, इन नई प्याज किस्मों के जारी होने से किसानों को अधिक उत्पादन, बेहतर गुणवत्ता और बेहतर बाजार मूल्य का लाभ मिलेगा। साथ ही अलग-अलग मौसम में स्थिर उपज मिलने से देश में प्याज की उपलब्धता और सप्लाई सिस्टम भी मजबूत होगा।

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