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पूर्वांचल में माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा, इन नदियों पर 4 पायलट प्रोजेक्ट तैयार

Micro Irrigation in Purvanchal

लखनऊ: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश में सिंचाई क्षमता के पूर्ण विकास और जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से लगातार प्रयास कर रही है। सिंचाई विभाग द्वारा मल्टी क्लस्टर एग्रीकल्चर डेवलपमेंट (एसीएडी) प्रोग्राम के तहत पूर्वांचल में माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा दिया जाएगा। इस कड़ी में गोरखपुर और संतकबीर नगर में राप्ती और कुवानों नदी पर 4 क्लस्टरों में माइक्रो इरिगेशन के पायलट प्रोजेक्ट का निर्माण करा रहा है। इन परियोजनाओं से जल संसाधनों का बेहतर उपयोग होगा और धान के साथ रबी व खरीफ फसलों को भी लाभ मिलेगा।

राप्ती और कुवानों नदी पर बन रहे हैं 4 क्लस्टर प्रोजेक्ट

यूपी सिंचाई विभाग की ओर से केंद्र सरकार के एमसीएडी प्रोग्राम के तहत गोरखपुर और संतकबीर नगर में पीपीआईएन तकनीकी आधारित चार पायलट प्रोजेक्ट तैयार किए जा रहे हैं। गोरखपुर जनपद में कौड़ीराम क्षेत्र में तालाब और राप्ती नदी पर बांसगांव-मलवा क्लस्टर का निर्माण किया जा रहा है। इसके अलावा राप्ती नदी पर खोराबार क्षेत्र में 161.33 सीसीए क्षमता का बरगढ़वा क्लस्टर और ब्रह्मपुर क्षेत्र में 157.11 सीसीए क्षमता वाला जंगल कौड़िया-I क्लस्टर बनाया जा रहा है।

एकीकृत प्रणाली से माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा

संतकबीर नगर जनपद में कुवानों नदी पर हैंसर बाजार क्षेत्र में 264.62 सीसीए क्षमता का राजधानी या प्रजापतिपुर क्लस्टर निर्माणाधीन है। इन सभी क्लस्टरों में प्रेशराइज्ड पाइपयुक्त सिंचाई नेटवर्क यानी पीपीआईएन के माध्यम से सभी जल स्रोतों को एकीकृत किया जा रहा है। इस प्रणाली के तहत जल उपयोग क्षमता 0.35 एलपीएस प्रति हेक्टेयर रखी गई है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक क्लस्टर में वाटर यूजर सोसाइटी का गठन किया जाएगा, जो सिंचाई नेटवर्क के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी संभालेगी।

75 प्रतिशत तक बढ़ेगी जल उपयोग दक्षता

सिंचाई विभाग माइक्रो इरिगेशन के जरिए जल उपयोग दक्षता बढ़ाने के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल को अपनाए हुए है। गोरखपुर और संतकबीर नगर में तैयार हो रहे इन चार पायलट प्रोजेक्ट के माध्यम से जल उपयोग दक्षता में लगभग 75 प्रतिशत तक की वृद्धि होने का अनुमान है। इससे सिंचाई के लिए पानी की खपत कम होगी और फसलों की उत्पादकता बढ़ेगी।

पूर्वांचल के किसानों को मिलेगा सीधा लाभ

ये पायलट प्रोजेक्ट न केवल गोरखपुर और संतकबीर नगर बल्कि पूर्वांचल के अन्य जिलों में भी माइक्रो इरिगेशन को बढ़ावा देंगे। पीपीआईएन तकनीकी से पानी की बर्बादी में कमी आएगी और फसलों को जरूरत के अनुसार सिंचाई मिल सकेगी। सिंचाई विभाग इन परियोजनाओं को पायलट आधार पर लागू कर रहा है, जिन्हें भविष्य में प्रदेश के अन्य जनपदों में भी विस्तार दिया जाएगा।

माइक्रो इरिगेशन उपकरणों पर मिल रही है सहायता

आरकेवीवाई योजना के पीडीएमसी के तहत किसानों को ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसे माइक्रो इरिगेशन उपकरणों पर भी सहायता प्रदान की जा रही है। इन पायलट प्रोजेक्ट का सफल संचालन पूर्वांचल के किसानों को कम लागत में बेहतर उत्पादन, दीर्घकालिक जल सुरक्षा और सतत कृषि विकास का लाभ देगा।

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