नई दिल्ली: बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी का असर अब मछली पालन पर भी साफ दिखाई दे रहा है। गर्म हवाओं के कारण तालाब का पानी तेजी से गर्म हो जाता है, जिससे मछलियों को काफी परेशानी होने लगती है। पानी का तापमान बढ़ने से मछलियों के खान-पान पर भी असर पड़ता है और वे सामान्य तरीके से फीड नहीं ले पातीं। विशेषज्ञों के अनुसार, गर्मी के मौसम में मछलियां अपनी सुविधा के अनुसार तालाब के अलग-अलग हिस्सों में रहती हैं और उसी हिसाब से फीड लेना पसंद करती हैं। ऐसे में यदि मछली पालक सही जगह पर दाना नहीं डालते हैं, तो कई मछलियां कमजोर रह जाती हैं जबकि कुछ ही मछलियां स्वस्थ और मोटी हो पाती हैं।
गलत तरीके से फीड डालना बन रहा समस्या
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समस्या के लिए काफी हद तक मछली पालक खुद जिम्मेदार होते हैं। जब तालाब का पानी ज्यादा गर्म हो जाता है, तो मछलियां अपनी आरामदायक जगह छोड़कर बाहर नहीं आतीं। ऐसे में यदि फीड सही स्थान तक नहीं पहुंचता, तो मछलियों को पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता।
अलग-अलग मछलियों के लिए अलग जगह जरूरी
मछली पालन में यह समझना जरूरी है कि हर प्रजाति की मछली तालाब के अलग हिस्से में रहती है और वहीं फीड लेना पसंद करती है। रोहू मछली तालाब के बीच के हिस्से में रहकर दाना खाती है। यह न तो पूरी तरह सतह पर आती है और न ही तली में जाती है, बल्कि बीच की परत में रहकर फीड लेती है। नैनी मछली तालाब की तली में रहना पसंद करती है। यह मछली सतह पर नहीं आती और नीचे ही रहकर दाने का इंतजार करती है। इसलिए इसके लिए फीड तालाब की तली तक पहुंचना जरूरी होता है। कतला मछली तालाब की सतह पर रहकर दाना खाती है। यह ऊपर की परत में सक्रिय रहती है और वहीं से अपना भोजन लेती है।
सही प्रबंधन से बढ़ेगा उत्पादन
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर मछली पालक इन बातों का ध्यान रखें और तालाब के अलग-अलग हिस्सों में संतुलित तरीके से फीड डालें, तो सभी मछलियों को पर्याप्त पोषण मिलेगा। इससे उनका विकास बेहतर होगा और उत्पादन में भी वृद्धि होगी। गर्मी के मौसम में सही प्रबंधन अपनाकर मछली पालन को अधिक लाभदायक बनाया जा सकता है।
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