मथुरा, 03 अगस्त 2026: बकरी पालन करने वाले पशुपालकों का मुख्य उद्देश्य अधिक दूध उत्पादन, स्वस्थ बच्चे और बकरों की तेज वृद्धि हासिल करना होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बकरियों और बकरों को संतुलित एवं उचित हरा चारा दिया जाए तो दूध उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार किया जा सकता है। केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान, मथुरा की वरिष्ठ वैज्ञानिक नीतिका शर्मा के अनुसार, कई बार छोटी-बड़ी बीमारियां और पेट में होने वाले संक्रमण भी बकरियों की वृद्धि और उत्पादन को प्रभावित करते हैं। ऐसे में पौष्टिक हरे चारे के साथ कुछ विशेष पेड़ों की पत्तियां खिलाना पशुओं के स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है।
हरे चारे के साथ इन पत्तियों को खिलाने की सलाह
विशेषज्ञों के अनुसार बकरियों और बकरों को नियमित रूप से नीम, अमरूद और सहजन की पत्तियां खिलानी चाहिए। विशेष रूप से वर्षा ऋतु के दौरान इन पेड़ों की पत्तियां पशुओं के लिए अत्यंत लाभदायक मानी जाती हैं। इन पत्तियों में नमी की मात्रा सामान्य हरे चारे की तुलना में कम होती है, जिससे वर्षा ऋतु में होने वाली पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा कम रहता है। वहीं इनमें प्रोटीन और अन्य उपयोगी तत्व पर्याप्त मात्रा में पाए जाते हैं, जो पशुओं के बेहतर विकास में सहायक होते हैं।
वर्षा ऋतु में क्यों जरूरी हैं पेड़ों की पत्तियां
विशेषज्ञों का कहना है कि वर्षा के मौसम में अधिक नमी वाला हरा चारा खाने से बकरियों में दस्त और अन्य पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। वहीं दूषित पानी पीने के कारण पेट में कीड़े होने की संभावना भी अधिक रहती है। नीम, अमरूद और सहजन की पत्तियां पेट में कीड़े होने की समस्या को नियंत्रित करने में सहायक मानी जाती हैं। यदि पशुओं के पेट में कीड़े हो जाएं तो वे पर्याप्त चारा खाने के बावजूद अपेक्षित वृद्धि नहीं कर पाते और उनका स्वास्थ्य भी प्रभावित होता है।
इस तरह खिलाएं पत्तियां, मिलेगा अधिक लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार बकरी जमीन पर पड़े चारे की अपेक्षा पेड़ की डालियों से पत्तियां तोड़कर खाना अधिक पसंद करती है। इस तरीके से खिलाई गई पत्तियां बकरियां अधिक रुचि से खाती हैं, जिससे उनका चारा सेवन बेहतर होता है और वृद्धि भी अच्छी होती है। यदि नीम, अमरूद या सहजन की पत्तियां आसानी से उपलब्ध न हों तो गूलर और अरडू के पत्ते भी खिलाए जा सकते हैं। सहजन का मुलायम तना भी बकरियां आसानी से खा लेती हैं और इससे उन्हें अतिरिक्त पोषण मिलता है।
कम होगी लागत, बढ़ेगा उत्पादन
विशेषज्ञों का मानना है कि पौष्टिक हरे चारे और उपयुक्त पेड़ों की पत्तियों का संतुलित उपयोग करने से बकरी पालन की लागत कम की जा सकती है। स्वस्थ पशु अधिक दूध देते हैं, उनकी वृद्धि बेहतर होती है और प्रजनन क्षमता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। हालांकि विशेषज्ञों ने पशुपालकों को सलाह दी है कि किसी भी प्रकार के चारे या पत्तियों को नियमित आहार में शामिल करने से पहले पशु चिकित्सा विशेषज्ञ या बकरी पालन विशेषज्ञ से परामर्श अवश्य लें। इससे पशुओं की पोषण संबंधी आवश्यकताओं के अनुसार सही आहार का चयन किया जा सकेगा और उत्पादन क्षमता में बेहतर परिणाम प्राप्त होंगे।
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