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सवालों के जवाब

यह एक विषाणु (वाइरस) रोग है, इस रोग का सबसे स्पष्ट लक्षण पत्तियों का नीचे या भीतर की ओर मुड़ना है। अन्य लक्षणों में कभी-कभी बाहरी बढ़वार के साथ पत्तियों की शिराओं का मोटा होना शामिल है। पत्तियाँ चमड़े जैसी तथा खुरदुरी हो जाती हैं तथा डंठलों में प्रायः मुड़ाव आ जाता है।

जैविक नियंत्रण : इस विषाणु को प्रसार करने से रोकने के लिए सफ़ेद तेल पायस (1%) का छिड़काव करें।

रासायनिक नियंत्रण : सफ़ेद मक्खियों की जनसंख्या को नियंत्रित करने से संक्रमण की तीव्रता कम की जा सकती है। बुआई के समय मिट्टी में डाईमेथोटेट या मेटासिस्टोक्स के 10 दिनों के अंतराल पर पत्तियों पर 4-5 छिड़काव से सफ़ेद मक्खियों की जनसंख्या को प्रभावी रूप से नियंत्रित किया जा सकता है।

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सात बरसों के रिसर्च के बाद गेहूं की इस नई किस्म को पंजाब के मोहाली स्थित नैशनल एग्री फूड बायोटेक्नॉलजी इंस्टीट्यूट या नाबी ने विकसित किया है। नाबी के पास इसका पेटेंट भी है। इस गेहूं की खास बात यह है कि इसका रंग काला है।

इस गेहूं की बालियां भी आम गेहूं जैसी हरी होती हैं, पकने पर दानों का रंग काला हो जाता है। काले गेहूं में एंथोसाएनिन नाम के पिगमेंट होते हैं। एंथोसाएनिन की अधिकता से फलों, सब्जियों, अनाजों का रंग नीला, बैंगनी या काला हो जाता है। एंथोसाएनिन नेचुरल एंटीऑक्सीडेंट भी है। इसी वजह से यह सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है।

आम गेहूं में एंथोसाएनिन महज 5पीपीएम होता है, लेकिन काले गेहूं में यह 100 से 200 पीपीएम के आसपास होता है। एंथोसाएनिन के अलावा काले गेहूं में जिंक और आयरन की मात्रा में भी अंतर होता है। काले गेहूं में आम गेहूं की तुलना में 60 फीसदी आयरन ज्यादा होता है। हालांकि, प्रोटीन, स्टार्च और दूसरे पोषक तत्व समान मात्रा में होते हैं।

बीज के लिए आप नाबी या अपने नज़दीकी एग्री इंस्टिट्यूट में सम्पर्क कर सकते हैं, साथ साथ इंडिया मार्ट या जस्ट डायल पर भी ऑनलाइन पता कर सकते हैं।

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अब दसवीं पास लोग भी खाद – बीज के दुकान से संबंधित लाइसेंस प्राप्त कर सकते हैं । बस जरूरत है एक ट्रैनिंग लेने की। सरकारी स्तर पर इससे संबंधित अनुज्ञप्ति जारी करने संबंधी नियमों में बदलाव किया गया है। लाइसेंस लेने के लिए दसवीं पास लोगों को भी आत्मा के स्तर पर होने वाले प्रशिक्षण कार्यक्रम में प्रशिक्षण प्राप्त करना होगा।

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