नई दिल्ली: इथेनॉल सप्लाई ईयर (ESY) 2024-25 (नवंबर से अक्टूबर) के दौरान भारत के इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम में मक्का की भूमिका और मजबूत होकर उभरी है। इथेनॉल, बायो-एनर्जी और अल्कोहल क्षेत्र की प्रमुख संस्था All India Distillers Association (AIDA) द्वारा साझा किए गए ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस अवधि में कुल इथेनॉल उत्पादन में मक्का की हिस्सेदारी करीब 48 प्रतिशत रही। यह पिछले सप्लाई ईयर के 42.6 प्रतिशत के मुकाबले उल्लेखनीय बढ़ोतरी है।
गन्ने को पीछे छोड़ मक्का बना प्रमुख कच्चा माल
हाल के वर्षों में मक्का ने पारंपरिक फीडस्टॉक गन्ने को पीछे छोड़ते हुए इथेनॉल उत्पादन का प्रमुख स्रोत बनकर उभरा है। AIDA ने अपने बयान में कहा कि मौजूदा अवधि में मक्का आधारित इथेनॉल उत्पादन में जबरदस्त वृद्धि दर्ज की गई है। इसे सरकार की अनुकूल नीतियों और मक्का आधारित इथेनॉल के लिए 71.86 रुपये प्रति लीटर की बढ़ी हुई खरीद कीमत का समर्थन मिला है। संस्था के अनुसार, खराब और सरप्लस अनाज के अलावा गन्ने का रस, बी-हैवी मोलासेस और सी-हैवी मोलासेस से मिलने वाला फीडस्टॉक भी उत्पादन में संतुलन बनाए रखने में मदद कर रहा है, जिससे एक संतुलित फीडस्टॉक मिक्स तैयार हो रहा है।
इथेनॉल सप्लाई में तेज रफ्तार
भारत का इथेनॉल सप्लाई प्रोग्राम लगातार गति पकड़ रहा है। ESY 2024-25 में कुल सप्लाई लगभग 1,039 करोड़ लीटर रही, जबकि कॉन्ट्रैक्टेड वॉल्यूम 1,163 करोड़ लीटर था। यानी करीब 89 प्रतिशत सप्लाई हासिल की गई। मक्का और चावल समेत कुल अनाज आधारित फीडस्टॉक से 718 करोड़ लीटर इथेनॉल की आपूर्ति हुई, जो कुल सप्लाई का लगभग 69 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष के 59 प्रतिशत से अधिक है। वहीं, गन्ना आधारित फीडस्टॉक का हिस्सा घटकर 321 करोड़ लीटर यानी 31 प्रतिशत रह गया, जो पिछले वर्ष 41 प्रतिशत था।
बायोफ्यूल इकोसिस्टम को मजबूती
AIDA के अध्यक्ष विजेंद्र सिंह ने कहा कि ताजा आंकड़े भारत के बायोफ्यूल इकोसिस्टम की बढ़ती मजबूती को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, मक्का और अन्य अनाज आधारित फीडस्टॉक का बढ़ता योगदान सप्लाई चेन को मजबूत कर रहा है और किसी एक स्रोत पर निर्भरता कम कर रहा है। उन्होंने कहा कि अब मक्का फीडस्टॉक का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा बन चुका है, जिससे इथेनॉल उत्पादन को शुगर साइकिल से सफलतापूर्वक अलग कर दिया गया है। इससे सालभर बायोफ्यूल की स्थिर सप्लाई सुनिश्चित होती है और देशभर के मक्का उत्पादक किसानों को भी लाभ मिल रहा है।
E20 से आगे की रणनीति
भारत वर्ष 2025 में 20 प्रतिशत ब्लेंडिंग का लक्ष्य हासिल कर चुका है और अब E20 से आगे की रणनीति पर विचार हो रहा है। AIDA ने सरकार से इथेनॉल-डीजल और आइसोब्यूटेनॉल ब्लेंडिंग पर नीतिगत स्पष्टता लाने और उच्च ब्लेंडिंग लक्ष्य तय करने की अपील की है, ताकि बढ़ी हुई उत्पादन क्षमता का पूरा उपयोग किया जा सके। वर्तमान में देश की कुल इथेनॉल उत्पादन क्षमता लगभग 2,000 करोड़ लीटर है। 380 से अधिक डेडिकेटेड डिस्टिलरी संचालित हैं और 33 परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं।
विदेशी मुद्रा में बड़ी बचत
AIDA के मुताबिक, इथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP) के चलते अब तक 1,55,000 करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। साथ ही, CO2 उत्सर्जन में भी उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। संस्था का कहना है कि मक्का की ओर बढ़ता रुझान ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थिरता दे रहा है और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) या उससे अधिक कीमत सुनिश्चित करने में मदद कर रहा है। इसके अलावा, फीडस्टॉक में विविधता से गन्ना उत्पादन में मानसून आधारित उतार-चढ़ाव के जोखिम को भी कम किया जा रहा है।
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