नई दिल्ली: इस साल देश के कई राज्यों में बाढ़ और भारी बारिश से किसानों की लाखों एकड़ फसल बर्बाद हुई है। इसके बावजूद भी देश के खाद्यान्न उत्पादन में कोई कमी नहीं दिख रही है, जो किसानों और उपभोक्ताओं दोनों के लिए राहत भरी खबर है। सरकार ने फसल वर्ष 2025-26 (जुलाई-जून) के लिए खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान 362.5 मिलियन टन लगाया है, जो कि पिछले साल (2024-25) के 353 मिलियन टन की तुलना में 2.4% अधिक है।
कृषि मंत्री का बयान
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि, “बाढ़ और अधिक बारिश के बावजूद धान, गेहूं, दालों और मोटे अनाजों का कुल उत्पादन नए उच्च स्तर पर पहुंचने की संभावना है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, असम और हरियाणा के कुछ हिस्से बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, फिर भी खरीफ फसल की स्थिति अच्छी है और इस साल का लक्ष्य 100% हासिल किया जा सकता है।”
बुवाई का रकबा बढ़ा
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव देवेश चतुर्वेदी ने बताया कि भारी बारिश से पंजाब, राजस्थान और तेलंगाना में धान और दलहन की फसल प्रभावित जरूर हुई है, लेकिन इस साल ज्यादा बुवाई के चलते नुकसान की भरपाई हो गई है।
- खरीफ फसलों का कुल बुवाई रकबा: 111.08 मिलियन हेक्टेयर
- सामान्य बुवाई रकबा: 109.6 मिलियन हेक्टेयर
- बढ़ोतरी: 2.5%
धान, दलहन, तिलहन, गन्ना और कपास की बुवाई पूरी हो चुकी है और अब बंपर पैदावार की उम्मीद है।
पिछले साल का उत्पादन
- 2024-25 में खरीफ फसल उत्पादन: 168 मिलियन टन
- कुल खाद्यान्न उत्पादन: 353.95 मिलियन टन
- प्रमुख रिकॉर्ड पैदावार: चावल, गेहूं, मक्का, मूंगफली, सोयाबीन
भारी बारिश से बदला फसल पैटर्न
क्रिसिल इंटेलिजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में अगस्त तक लगातार हुई बारिश से धान, कपास, बाजरा, मक्का और चना जैसी फसलें प्रभावित हुईं।
इसके बावजूद रबी सीजन की तैयारी मजबूत है:
- रबी सीजन में बीज की आवश्यकता: 22.9 मिलियन टन
- वर्तमान उपलब्धता: 25 मिलियन टन
कृषि मंत्री ने कहा कि, “बारिश और अन्य कारक अक्सर फसल पैटर्न में बदलाव लाते हैं। इस साल अच्छी बारिश के कारण बुवाई का रकबा बढ़ा है और उर्वरकों की मांग भी अधिक हुई है।”
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