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डीडीडब्ल्यू 55 (डी) करन मंजरी गेहूं की किस्म से बढ़ेगी किसानों की पैदावार

डीडीडब्ल्यू 55 (डी) करन मंजरी

नई दिल्ली: देशभर में इस साल मॉनसून के दौरान सामान्य से अधिक वर्षा होने के बाद मिट्टी में पर्याप्त नमी बनी हुई है, जिससे किसानों को रबी सीजन की फसलों के लिए बड़ी राहत मिली है। इसी के चलते देश के मध्य और उत्तर भारत के किसान अब गेहूं की बुआई की तैयारियों में जुट गए हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने इस सीजन के लिए किसानों को कठिया गेहूं की उन्नत किस्म ‘डीडीडब्ल्यू 55 (डी) करन मंजरी’ की बुवाई की सलाह दी है, जो 20 अक्टूबर से 5 नवंबर के बीच की जा सकती है।

मध्य और उत्तर भारत के किसानों के लिए उपयुक्त किस्म

यह गेहूं की किस्म विशेष रूप से मध्य मैदानी क्षेत्र की परिस्थितियों के लिए विकसित की गई है। इसमें मध्य प्रदेश, गुजरात, छत्तीसगढ़, राजस्थान के कोटा और उदयपुर संभाग तथा उत्तर प्रदेश के झांसी संभाग शामिल हैं। डीडीडब्ल्यू 55 (डी) करन मंजरी सीमित सिंचाई, समय पर बुआई और प्रतिकूल मौसम की स्थितियों में भी उच्च पैदावार देने में सक्षम है।

बीज और बुवाई की सिफारिश

प्रति हेक्टेयर बुवाई के लिए 100 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। कृषि वैज्ञानिकों ने सलाह दी है कि बीज की बुआई से पहले उसे टेबुकोनाजोल 2% डीएस @ 1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज से उपचारित किया जाए। उर्वरक की दृष्टि से 90:60:40 किलोग्राम एनपीके/हेक्टेयर का अनुपात उपयुक्त है, जिसमें आधा नाइट्रोजन और पूरा फास्फोरस तथा पोटैशियम बुआई के समय डालना चाहिए। शेष नाइट्रोजन 45–50 दिन बाद (पहले नोड की अवस्था में) दी जानी चाहिए।

सिंचाई की सीमित जरूरत

इस किस्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे अधिक सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती। बुआई से पहले और 45-50 दिन बाद कुल दो सिंचाइयां पर्याप्त रहती हैं। यह इसे सिंचाई-संकटग्रस्त इलाकों के लिए भी उपयुक्त बनाती है।

अन्य किस्मों से अधिक पैदावार

प्रयोगों में पाया गया है कि डीडीडब्ल्यू 55 (डी) की औसत उपज 35.6 क्विंटल/हेक्टेयर तक होती है, जबकि समय पर बुआई और सीमित सिंचाई के दौरान यह 56.5 क्विंटल/हेक्टेयर तक उत्पादन दे सकती है। यह पैदावार एचडब्ल्यू 8623, डीडीडब्ल्यू 47 और एचडब्ल्यू 8823 जैसी प्रमुख किस्मों की तुलना में काफी बेहतर है।

रोग प्रतिरोध क्षमता

डीडीडब्ल्यू 55 (डी) करन मंजरी की रोग प्रतिरोध क्षमता भी उल्लेखनीय है। यह तीलिया, कंडुआ, पीली रस्ट और स्ट्रीक रोगों के प्रति मजबूत प्रतिरोध दिखाती है। परीक्षणों में इस किस्म में रस्ट्स 7%, तीलिया 3.0% और कंडुआ 11.1% स्कोर दर्ज किया गया है, जो इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को दर्शाता है।

पौष्टिकता और गुणवत्ता

इस गेहूं की किस्म में प्रोटीन की मात्रा अधिक है और हजार दानों का औसत वजन 52 ग्राम पाया गया है। यह इसे पोषण की दृष्टि से भी श्रेष्ठ बनाता है। साथ ही इसके दाने भरपूर और सूखा सहनशील हैं, जिससे किसानों को कम पानी में भी अच्छी फसल प्राप्त हो सकती है।

किसानों की आय में होगी बढ़ोतरी

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि डीडीडब्ल्यू 55 (डी) करन मंजरी गेहूं की किस्म से न सिर्फ किसानों की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि उनकी आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि संभव है। विशेष रूप से उन क्षेत्रों में जहां सिंचाई की सुविधा सीमित है, यह किस्म किसानों के लिए नए अवसर और स्थायी कृषि का समाधान साबित हो सकती है।

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