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पंजाब में फसल नुकसान पर मुआवजा मांग, प्रति एकड़ पचास हजार प्रस्ताव

Crop Damage in Punjab

चंडीगढ़: पंजाब में फसल नुकसान को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने राज्य सरकार से मांग की है कि प्रभावित किसानों को प्रति एकड़ पचास हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए। यह मांग मालवा क्षेत्र में आयोजित एक रैली के दौरान उठाई गई, जहां किसानों की समस्याओं को प्रमुखता से रखा गया। उन्होंने कहा कि बठिंडा, मानसा, फाजिल्का और श्री मुक्तसर साहिब जिलों में हाल ही में हुई बारिश और ओलावृष्टि से फसलों को भारी नुकसान हुआ है, जिससे किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं।

किसानों की स्थिति गंभीर, सरकार से तत्काल राहत की मांग

रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि राज्यभर से किसानों के लगातार फोन आ रहे हैं, जिनमें वे अपनी परेशानियां बता रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले वर्ष आई बाढ़ में धान की फसल के नुकसान का मुआवजा अब तक किसानों को नहीं मिला है। ऐसे में अब गेहूं की फसल के नुकसान के बाद किसान दोहरी मार झेल रहे हैं और उन्हें तत्काल राहत की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार से अपील की कि किसानों को प्रति एकड़ पचास हजार रुपये का मुआवजा दिया जाए, ताकि उनकी आर्थिक स्थिति को संभाला जा सके और वे आगे की खेती के लिए तैयार हो सकें।

आढ़ती और समर्थन मूल्य को लेकर भी उठाए मुद्दे

सुखबीर सिंह बादल ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी गेहूं और धान की खरीद में आढ़तियों के लिए कमीशन की बहाली का समर्थन करती है। उनका कहना है कि मंडियों में बढ़ती लागत को देखते हुए यह आवश्यक है कि आढ़ती समुदाय को उचित समर्थन मिले। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे को प्रभावी तरीके से केंद्र सरकार के सामने नहीं उठा पा रही है, जिससे आढ़ती समुदाय को नुकसान हो रहा है।

युवाओं और शिक्षा को लेकर किए बड़े वादे

अपने भाषण में उन्होंने भविष्य की योजनाओं का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी आगामी चुनाव में सत्ता में आती है, तो राज्य में एक कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी, जहां हर साल एक लाख युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके केंद्र हर जिले में स्थापित किए जाएंगे। साथ ही उन्होंने यह भी घोषणा की कि अनुसूचित जाति, पिछड़े वर्ग और गरीब वर्ग के छात्रों को स्नातक स्तर तक निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे शिक्षा के क्षेत्र में समान अवसर सुनिश्चित किए जा सकें।

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