नई दिल्ली: कृषि में कीट नियंत्रण हमेशा से एक चुनौती रहा है। बढ़ती रासायनिक उर्वरक और कीटनाशकों की लागत और उनके दुष्प्रभाव को देखते हुए अब किसान प्राकृतिक और जैविक विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं। ऐसे ही एक प्रभावी जैविक उपाय के रूप में सामने आई है मिर्च (Capsicum)। सिर्फ आपकी थाली का स्वाद और रंग बढ़ाने वाली मिर्च, खेतों में कीट प्रबंधन के लिए भी बेहद कारगर साबित हो सकती है।
मिर्च और कैप्साइसिन: कैसे बनती है प्रभावी
मिर्च में मौजूद कैप्साइसिन सक्रिय तत्व है, जो कीटों और स्तनधारी जीवों जैसे हाथी के लिए प्राकृतिक रिपेलेंट का काम करता है। मिर्च का कैप्साइसिन कीटों के लिए विषैला नहीं है बल्कि उन्हें दूर भगाने, कमजोर करने और नियंत्रित करने में सक्षम है। यह घर में तैयार किए गए स्प्रे या रजिस्टर्ड उत्पादों में कीट नियंत्रण के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कैप्साइसिन को नीम, लहसुन या सोयाबीन तेल के साथ मिलाकर भी स्प्रे के रूप में प्रयोग किया जा सकता है।
कैप्साइसिन किन कीटों पर प्रभावी है?
एफिड्स, लूपर्स, आर्मीवॉर्म्स, स्पाइडर माइट्स, थ्रिप्स, लीफमाइनर्स, व्हाइटफ्लाइज।
कैसे काम करता है:
- पौधों की सतह पर लगने के बाद कीट पौधों से दूर हो जाते हैं।
- वयस्क कीटों की अंडे देने की क्षमता कम कर देता है।
- कीटों के मेटाबॉलिज्म और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर असर डालता है।
- कीटों की कोशिका झिल्लियों को नुकसान पहुंचाकर उन्हें कमजोर और मारता है।
- कैप्साइसिन उत्पाद ग्रैन्यूलर, डस्ट और लिक्विड रूपों में उपलब्ध हैं।
कैप्साइसिन का प्रयोग कैसे करें
- कीटों के सीधे संपर्क वाले हिस्सों पर नियमित रूप से लगाएं।
- साप्ताहिक पत्तियों पर छिड़काव सबसे अच्छा परिणाम देता है।
- कम कीट दबाव में कम मात्रा और घने पौधों में अधिक मात्रा का प्रयोग करें।
- बारिश के बाद छिड़काव दोहराएं।
- प्रति एकड़ कम से कम 10 गैलन स्प्रे आवश्यक है।
सावधानियां
- कैप्साइसिन मधुमक्खियों के लिए जहरीला है।
- इसे “खतरनाक” लेबल किया गया है, क्योंकि गलत उपयोग से स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।
- गलती से निगलने पर हानिकारक या जहरीला हो सकता है।
- त्वचा में जलन और आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
- प्रयोग करते समय लंबी आस्तीन, लंबे पैंट, दस्ताने, मोजे, जूते और सुरक्षात्मक चश्मा पहनना आवश्यक है।
मिर्च का कैप्साइसिन किसानों को किफायती, प्राकृतिक और पर्यावरण अनुकूल कीट नियंत्रण का विकल्प देता है। सही तरीके से प्रयोग करने पर यह फसलों को एफिड्स, आर्मीवॉर्म्स, थ्रिप्स और अन्य कीटों से बचाने में मददगार साबित होता है।
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