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उत्तर प्रदेश में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अभियान शुरू

uttar pradesh women empowerment

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से प्रदेश के सभी 75 जिलों में परिवार संतृप्तिकरण अभियान शुरू किया है। यह विशेष अभियान 5 अगस्त से 20 अगस्त तक चलाया जाएगा। इसके तहत गांव-गांव और घर-घर जाकर ऐसे पात्र परिवारों की पहचान की जाएगी, जो अभी तक स्वयं सहायता समूहों या ग्रामीण आजीविका मिशन से नहीं जुड़े हैं। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक पात्र महिला को सरकारी योजनाओं, बैंकिंग सेवाओं और आजीविका के अवसरों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाना है।

घर-घर सर्वे कर महिलाओं को जोड़ा जाएगा स्वयं सहायता समूहों से

ग्रामीण आजीविका मिशन के मिशन निदेशक अरुण कुमार के अनुसार, अभियान के दौरान विकासखंड और ग्राम पंचायत स्तर पर नियुक्त नोडल अधिकारी घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। इस दौरान उन परिवारों की पहचान की जाएगी, जहां महिलाएं अभी तक स्वयं सहायता समूहों का हिस्सा नहीं हैं। सर्वे के बाद पात्र महिलाओं को समूहों से जोड़कर बचत, ऋण, प्रशिक्षण और स्वरोजगार से संबंधित सुविधाओं का लाभ दिलाया जाएगा।

सभी पात्र समूहों के खुलवाए जाएंगे बैंक खाते

अभियान के तहत उत्तर प्रदेश के सभी पात्र स्वयं सहायता समूहों के बैंक खाते प्राथमिकता के आधार पर खुलवाने के निर्देश दिए गए हैं। इससे समूहों को सरकारी आर्थिक सहायता, बैंक ऋण और विभिन्न योजनाओं का लाभ सीधे उनके खातों में मिल सकेगा। बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने के बाद ग्रामीण महिलाओं के लिए छोटे उद्योग शुरू करना और अपने व्यवसाय का विस्तार करना भी आसान होगा।

कोई भी पात्र परिवार योजनाओं से नहीं रहेगा वंचित

मिशन निदेशक ने बताया कि परिवार संतृप्तिकरण अभियान का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र परिवार सरकारी योजनाओं, स्वयं सहायता समूहों और आजीविका के संसाधनों से वंचित न रहे। सरकार चाहती है कि प्रत्येक पात्र महिला को आर्थिक गतिविधियों से जोड़कर उसकी आय बढ़ाई जाए और ग्रामीण परिवारों को आत्मनिर्भर बनाया जाए।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया बल

सरकार का मानना है कि अधिक से अधिक महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने से गांवों में रोजगार के नए अवसर विकसित होंगे। खाद्य प्रसंस्करण, कृषि आधारित गतिविधियां, डेयरी, पशुपालन, हस्तशिल्प, सिलाई-कढ़ाई और अन्य लघु उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और महिलाओं की नियमित आय में वृद्धि होगी।

प्रदेश में पहले से सक्रिय हैं 10 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूह

वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 10 लाख 10 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं, जिनसे एक करोड़ 19 लाख से अधिक परिवार जुड़े हुए हैं। इन समूहों ने ग्रामीण महिलाओं को केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उन्हें उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर भी दिया है। आज बड़ी संख्या में महिलाएं खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, पशुपालन, हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद, डिजिटल सेवाओं और अन्य लघु उद्योगों के माध्यम से नियमित आय अर्जित कर रही हैं।

बचत के साथ उद्यमिता को भी मिलेगा बढ़ावा

ग्रामीण आजीविका मिशन का लक्ष्य अब केवल बचत और ऋण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को सफल उद्यमी बनाना भी है। परिवार संतृप्तिकरण अभियान के माध्यम से बड़ी संख्या में नई महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक और सामाजिक बदलाव को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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