नई दिल्ली: पशुपालन में नवजात बच्चों की सही देखभाल बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि यही भविष्य में आय का प्रमुख स्रोत बनते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के समय थोड़ी सी लापरवाही भी बच्चों की मृत्यु का कारण बन सकती है। इसलिए पशुपालकों को पहले से तैयारी कर उचित देखभाल सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि मृत्यु दर को कम किया जा सके और उत्पादन में वृद्धि हो।
जन्म के तुरंत बाद देखभाल है जरूरी
विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही गाय या भैंस बच्चा देती है, उसे मां के पास रखना चाहिए। मां द्वारा बच्चे को चाटने से उसका शरीर साफ होता है, तापमान संतुलित रहता है और रक्त संचार बेहतर होता है। यदि मां बच्चे को नहीं चाटती है, तो पशुपालक को साफ कपड़े से बच्चे को सुखाना चाहिए और सांस लेने में परेशानी होने पर आवश्यक उपाय करने चाहिए।
नाल की सफाई और संक्रमण से बचाव
जन्म के तुरंत बाद बच्चे की नाल को सुरक्षित तरीके से काटना और उस स्थान पर दवा लगाना बेहद जरूरी है, ताकि संक्रमण से बचाव हो सके। साथ ही बच्चे के शरीर पर मौजूद झिल्ली को हटाकर उसे साफ करना चाहिए, जिससे वह आसानी से सांस ले सके।
खीस पिलाना सबसे महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों के अनुसार जन्म के एक से दो घंटे के भीतर बच्चे को मां का पहला दूध पिलाना अनिवार्य है। यह दूध बच्चों को रोगों से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है और उनकी प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाता है। समय पर खीस न मिलने से बच्चों के बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
सही पोषण और दवा का ध्यान
नवजात बच्चों को उनके वजन के अनुसार दूध पिलाना चाहिए और दिन में दो बार नियमित रूप से आहार देना चाहिए। इसके अलावा 10 दिन और 21 दिन की उम्र में पेट के कीड़ों की दवा देना जरूरी होता है, जिससे उनका स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है।
मौसम के अनुसार रखें विशेष ध्यान
पशु शिशुओं को अत्यधिक सर्दी या गर्मी से बचाना भी जरूरी है। उनके लिए उचित आवास और साफ-सुथरा वातावरण होना चाहिए, ताकि वे स्वस्थ रूप से विकसित हो सकें। विशेषज्ञों का मानना है कि इन सावधानियों को अपनाकर पशुपालक न केवल बच्चों की मृत्यु दर कम कर सकते हैं, बल्कि भविष्य में अधिक मुनाफा भी कमा सकते हैं।
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