नई दिल्ली: भारत दूध और भैंस मांस उत्पादन में विश्व में अग्रणी होने के बावजूद निर्यात के मामले में अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि पशुओं में फैलने वाली खुरपका-मुंहपका बीमारी इस दिशा में सबसे बड़ी बाधा बनकर सामने आई है। इसी चुनौती से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बड़े स्तर पर कदम उठाते हुए देश के विभिन्न हिस्सों को रोग मुक्त क्षेत्र बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।
रोग मुक्त क्षेत्र बनाने की दिशा में पहल
पशुपालन और डेयरी क्षेत्र को मजबूत करने के लिए सरकार द्वारा रोग मुक्त क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं। इसके तहत खुरपका-मुंहपका बीमारी को नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार और नौ राज्यों की संयुक्त टीम इस दिशा में काम कर रही है, ताकि पशुओं को इस घातक बीमारी से मुक्त कर निर्यात को बढ़ावा दिया जा सके।
रोग मुक्त क्षेत्र घोषित करने के सख्त मानक
किसी भी राज्य या क्षेत्र को रोग मुक्त घोषित करने के लिए कई सख्त मानकों का पालन करना आवश्यक है। इसमें पिछले दो वर्षों में बीमारी का कोई मामला न होना, टीकाकरण का उच्च स्तर पर पूरा होना और हर मामले की पूरी जानकारी उपलब्ध होना शामिल है। इसके अलावा नियमित निगरानी और सीमावर्ती क्षेत्रों में पशुओं के आवागमन पर कड़ी नजर रखना भी अनिवार्य है।
नौ राज्यों में तैयारी तेज
सरकार के अनुसार कर्नाटक, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और गुजरात में इस दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है। इन राज्यों को रोग मुक्त क्षेत्र बनाने की योजना पर काम चल रहा है, जिससे पशु उत्पादों के निर्यात में वृद्धि की उम्मीद जताई जा रही है।
निर्यात बढ़ाने में मिलेगी मदद
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश के बड़े हिस्से को इस बीमारी से मुक्त घोषित किया जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय डेयरी और मांस उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। इससे किसानों और पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
पशुपालकों के लिए नई उम्मीद
सरकार की इस पहल से पशुपालकों को नई उम्मीद मिली है। यदि रोग नियंत्रण में सफलता मिलती है, तो उत्पादन के साथ-साथ निर्यात में भी बड़ा इजाफा हो सकता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर पैदा होंगे।
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