पटना: बिहार में दक्षिण-पश्चिम मानसून के पहुंचने के बावजूद किसानों को पर्याप्त वर्षा का इंतजार है। राज्य में तापमान लगातार ऊंचा बना हुआ है, जबकि बारिश सामान्य से काफी कम दर्ज की जा रही है। ऐसे हालात में धान की खेती की तैयारी कर रहे किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए किसान आसमान के साथ-साथ नहरों पर भी उम्मीद लगाए बैठे हैं, ताकि समय पर सिंचाई हो सके और धान की रोपाई शुरू की जा सके। मौसम विभाग के अनुसार जून महीने में राज्य में सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम वर्षा होने का अनुमान है। वहीं आने वाले दिनों में भी व्यापक और अच्छी बारिश की संभावना कम बताई गई है। ऐसे में खरीफ मौसम की सबसे महत्वपूर्ण फसल धान की खेती पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
दक्षिण बिहार में अधिक गर्मी, उत्तर बिहार को मिलेगी राहत
मौसम विभाग की दैनिक रिपोर्ट के अनुसार एक जुलाई तक दक्षिण बिहार के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 38 से 42 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। हालांकि दक्षिण-पूर्व बिहार के भागलपुर, बांका, जमुई, मुंगेर और खगड़िया जैसे जिलों में अधिकतम तापमान 32 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है।
वहीं उत्तर बिहार के अधिकांश जिलों में अधिकतम तापमान 32 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। विभाग का कहना है कि अगले तीन से चार दिनों में अधिकतम तापमान में तीन से चार डिग्री सेल्सियस तक गिरावट आ सकती है, जिससे लोगों और किसानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
धान उत्पादक जिलों में सबसे अधिक संकट
दक्षिण-पश्चिम बिहार के औरंगाबाद, अरवल, बक्सर, भोजपुर, रोहतास और कैमूर जिले राज्य के प्रमुख धान उत्पादक क्षेत्रों में गिने जाते हैं। इन जिलों में इन दिनों तापमान सामान्य से अधिक बना हुआ है, जिससे धान की खेती प्रभावित हो रही है। कैमूर जिले में पिछले चौबीस घंटों के दौरान अधिकतम तापमान 43 डिग्री सेल्सियस से अधिक दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान लगभग 31 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं बक्सर, रोहतास, भोजपुर, अरवल और औरंगाबाद में अधिकतम तापमान 40 से 41 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
धान की नर्सरी बचाना बना बड़ी चुनौती
लगातार बढ़ती गर्मी और वर्षा की कमी के कारण किसानों के सामने धान की नर्सरी को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती बन गया है। बड़े स्तर पर धान की खेती करने वाले किसान संतोष सिंह का कहना है कि तेज गर्मी के कारण धान की नर्सरी को बचाने के लिए लगभग हर दूसरे दिन सिंचाई करनी पड़ रही है। यदि समय पर पानी नहीं दिया जाए तो पौधों के सूखने का खतरा बढ़ जाता है। किसानों का कहना है कि सिंचाई की बढ़ती जरूरत से खेती की लागत भी लगातार बढ़ रही है, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ने लगा है।
बढ़ते तापमान से बढ़ रहा संक्रमण का खतरा
भोजपुर जिले के किसान राकेश कुमार सिंह ने बताया कि धान की नर्सरी में पौध लाल पड़ने लगी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह समस्या बढ़ते तापमान और फफूंद जनित संक्रमण के कारण हो सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान मौसम फफूंद के विकास के लिए अनुकूल है। यदि किसानों को नर्सरी में इस प्रकार के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत अनुशंसित फफूंदनाशक का प्रयोग करना चाहिए, ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक राज्य में पर्याप्त वर्षा नहीं होती, तब तक किसानों को सिंचाई, नर्सरी प्रबंधन और रोग नियंत्रण पर विशेष ध्यान देना होगा। समय पर उचित प्रबंधन अपनाने से धान की फसल को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है।
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