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उत्तर प्रदेश में मधुमक्खी पालन को मिलेगा बढ़ावा

beekeeping Uttar Pradesh

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार मधुमक्खी पालन को प्रोत्साहित कर ग्रामीण क्षेत्रों में आय बढ़ाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसी क्रम में प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से शुक्रवार को शहद उत्पादन एवं प्रसंस्करण क्षेत्र से जुड़े एक विदेशी प्रतिनिधिमंडल ने शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान प्रदेश में गुणवत्तायुक्त शहद उत्पादन, प्रसंस्करण और तकनीकी सहयोग की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

उन्नत तकनीक से बढ़ेगा शहद उत्पादन

प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि उनके देश में उच्च गुणवत्ता वाले शहद उत्पादन, प्रसंस्करण और रोग नियंत्रण के लिए आधुनिक तकनीक विकसित की गई है। इन तकनीकों को प्रशिक्षण और सहयोग के माध्यम से उत्तर प्रदेश के मधुमक्खी पालकों तक पहुंचाया जा सकता है। इससे उत्पादन की गुणवत्ता में सुधार होगा और किसानों को बेहतर लाभ मिल सकेगा।

रायबरेली और बाराबंकी में अपार संभावनाएं

प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश प्रवास के दौरान रायबरेली और बाराबंकी जिलों का दौरा कर स्थानीय मधुमक्खी पालकों से संवाद किया। अध्ययन में इन क्षेत्रों में शहद उत्पादन की व्यापक संभावनाएं सामने आईं। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि भारत और उस देश के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते से तकनीकी और व्यापारिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी।

किसानों की आय बढ़ाने पर सरकार का जोर

उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उन्नत तकनीक और अनुभव का लाभ प्रदेश के मधुमक्खी पालकों को दिया जाएगा, जिससे गुणवत्तायुक्त और निर्यात योग्य शहद उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। इससे प्रदेश के लोगों को स्वास्थ्यवर्धक शहद उपलब्ध होगा और मधुमक्खी पालकों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

शहद आधारित उत्पादों में नए अवसर

उन्होंने बताया कि शहद आधारित उत्पाद जैसे मिठाइयां और अन्य स्वास्थ्यवर्धक वस्तुओं के निर्माण में भी संभावनाएं बढ़ रही हैं। विभाग द्वारा नई तकनीकों का प्रचार-प्रसार कर किसानों और उद्यमियों को प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे यह क्षेत्र एक सशक्त व्यवसाय के रूप में विकसित हो सके।

प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजने की तैयारी

उपमुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मधुमक्खी पालन और शहद उत्पादन से जुड़े किसानों व उद्यमियों को विशेष प्रशिक्षण के लिए विदेश भेजने की कार्ययोजना तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर वे स्वयं भी प्रतिनिधिमंडल के साथ विदेश यात्रा कर तकनीकी सहयोग को और मजबूत बनाने का प्रयास करेंगे।

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