Site icon Agriculture| Kheti| Krishi| Farm| Farmer| Agriculture| News

खरीफ फसलों की बुवाई पर वैज्ञानिकों की सलाह

kharif crop advisory

पटना: अप्रैल के अंत और मई की शुरुआत में मौसम में आए बदलाव के बीच कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई को लेकर महत्वपूर्ण सलाह दी है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय द्वारा जारी साप्ताहिक रिपोर्ट में अदरक, हल्दी, मक्का और अन्य फसलों की खेती के लिए अनुकूल समय और तकनीकी सुझाव दिए गए हैं।

हल्दी की बुवाई के लिए अनुकूल समय

वैज्ञानिकों के अनुसार हालिया बारिश के बाद खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध है, जो हल्दी की खेती के लिए उपयुक्त है। किसानों को 15 मई से हल्दी की बुवाई शुरू करने की सलाह दी गई है। उत्तर बिहार के लिए ‘राजेंद्र सोनिया’ और ‘राजेंद्र सोनाली’ किस्मों को उपयुक्त बताया गया है।

खेत की तैयारी और पोषण प्रबंधन जरूरी

हल्दी की अच्छी पैदावार के लिए खेत की सही तैयारी पर जोर दिया गया है। जुताई के समय गोबर की सड़ी खाद के साथ नाइट्रोजन, स्फूर, पोटाश और जिंक का संतुलित उपयोग करने की सलाह दी गई है। बीज दर 20 से 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर रखने और बुवाई से पहले बीज उपचार करने को जरूरी बताया गया है। रोपाई 30×20 सेंटीमीटर की दूरी और 5 से 6 सेंटीमीटर गहराई पर करने की सलाह दी गई है।

अदरक की खेती के लिए भी सही मौका

अदरक की खेती के लिए भी 15 मई से बुवाई का समय अनुकूल बताया गया है। किसानों को ‘मरान’ और ‘नदिया’ किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही खेत की तैयारी के दौरान गोबर की खाद और आवश्यक पोषक तत्वों का उपयोग करने पर जोर दिया गया है। अदरक के लिए 18 से 20 क्विंटल बीज प्रति हेक्टेयर और 30×20 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपाई करने की सलाह दी गई है।

मक्का और धान की तैयारी शुरू करें

वैज्ञानिकों ने खरीफ मक्का की खेती करने वाले किसानों को 25 मई से बुवाई शुरू करने का सुझाव दिया है। इसके अलावा धान की रोपाई के लिए ‘गजेंद्र’ किस्म को उपयुक्त बताया गया है। किसानों को समय रहते खेत की तैयारी पूरी करने की सलाह दी गई है।

मौसम के अनुसार खेती की रणनीति

विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम को देखते हुए फसल चयन और बुवाई का समय तय करना बेहद जरूरी है। सही समय पर सही फसल की बुवाई करने से उत्पादन बढ़ता है और किसानों को बेहतर लाभ मिलता है। इस तरह की वैज्ञानिक सलाह किसानों को जोखिम कम करने और उत्पादन बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती है।

ये भी पढ़ें: रिकॉर्ड स्तर पर चावल की खरीद, बाजार पर असर के संकेत

Exit mobile version