पटना: बिहार में किसानों से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन को तेज करने की तैयारी शुरू हो गई है। संयुक्त किसान मोर्चा ने, बिहार में 9 अप्रैल को पटना में विशाल किसान संसद आयोजित करने का ऐलान किया है। इस कार्यक्रम के माध्यम से किसानों से जुड़े राष्ट्रीय और राज्य स्तर के कई अहम मुद्दों पर चर्चा करते हुए आगे के संघर्ष की रणनीति तय की जाएगी।
पटना स्थित स्वामी सहजानंद सरस्वती आश्रम में शुक्रवार को आयोजित चिंतन शिविर में राज्य के विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में कुल 17 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और किसानों की मौजूदा समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि किसानों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए राज्यभर में व्यापक जन अभियान चलाया जाएगा। इसी अभियान के तहत पटना में किसान संसद आयोजित कर बड़े आंदोलन की शुरुआत करने की योजना बनाई गई है।
किसानों के अधिकारों के लिए व्यापक अभियान की तैयारी
बैठक में किसानों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया। किसान संगठनों ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते में कृषि क्षेत्र को शामिल किए जाने का कड़ा विरोध किया। किसान नेताओं का कहना है कि यदि इस तरह के समझौते लागू किए जाते हैं तो इसका सीधा असर देश के छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ेगा। विदेशी कृषि उत्पादों को भारी सब्सिडी मिलने के कारण भारतीय किसानों की प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है, जिससे उनकी आय और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
कई कानूनों को वापस लेने की उठी मांग
बैठक के दौरान प्रस्तावित बिजली विधेयक, बीज विधेयक और कीटनाशक विधेयक को किसानों के हितों के खिलाफ बताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग उठाई गई। इसके साथ ही किसानों की कर्जमाफी, मासिक किसान पेंशन, न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी, दूध और गन्ना उत्पादकों के हितों की रक्षा तथा धान खरीद में अनियमितताओं पर रोक लगाने की मांग भी प्रमुखता से सामने आई।
किसान नेताओं ने भूमि अधिग्रहण के मामलों में किसानों को उचित मुआवजा देने, दाखिल-खारिज और सर्वे प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई करने तथा खाद की कालाबाजारी पर सख्ती से रोक लगाने की भी मांग की। इसके अलावा किसानों को सस्ती दरों पर खाद, बीज और सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने तथा सभी फसलों के लिए प्रभावी बीमा व्यवस्था लागू करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
राज्यभर से किसानों को जोड़ने की योजना
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि किसानों से जुड़े इन मुद्दों को लेकर राज्यभर में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक किसान और किसान संगठन इस आंदोलन से जुड़ सकें। किसान संसद में बिहार के विभिन्न जिलों से किसानों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष पहल की जाएगी। कार्यक्रम के संचालन के लिए नौ सदस्यीय संचालन समिति का गठन किया गया है, जिसमें शशि कुमार को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं चिंतन शिविर की अध्यक्षता वशिष्ठ प्रसाद सिंह ने की।
बैठक में किसान नेता दिनेश कुमार, अशोक प्रसाद सिंह, रामायण सिंह, प्रदीप प्रियदर्शी, अशोक प्रियदर्शी, जालंधर यदुवंशी, सुधीर कुमार, देव कुमार, सुरेश कुमार, प्रमोद कुमार सिंह, कृष्णा सिंह, शशि कुमार, शिव शंकर सिंह चितू, सत्येन्द्र नारायण सिंह, अमरेश नंदन, कांति शर्मा, गणेश कुमार और लोरिक यादव समेत कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार किसानों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं करती है तो आने वाले समय में व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। उनका कहना है कि पटना में आयोजित होने वाली किसान संसद इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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