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अगेती गेहूं की बुवाई शुरू, जानें सही समय, सिंचाई, बीज उपचार व खाद प्रबंधन

अगेती गेहूं की बुवाई

नई दिल्ली: अक्टूबर के दूसरे पखवाड़े से लेकर 15 दिसंबर तक देशभर में रबी सीजन रहता है। इस अवधि में कई तरह की फल-सब्जियां, तिलहन और दलहन की खेती की जाती है, लेकिन इनमें गेहूं सबसे महत्वपूर्ण फसल मानी जाती है। उत्तर, मध्य और पश्चिमी भारत के कई राज्यों में गेहूं मुख्य रबी फसल है, इसलिए किसान अगेती गेहूं की बुवाई को प्राथमिकता देते हैं। अगेती गेहूं जल्दी तैयार हो जाता है, मौसम के उतार-चढ़ाव का खतरा कम रहता है और पैदावार भी सामान्य गेहूं से बेहतर मिलती है।

अगेती गेहूं की बुवाई का सही समय

विशेषज्ञों के अनुसार अगेती गेहूं की बुवाई अक्टूबर के अंतिम सप्ताह से नवंबर के पहले सप्ताह तक कर देनी चाहिए। इस समय तापमान और मिट्टी की नमी फसल के लिए अनुकूल रहती है, जिससे पौधे मजबूत बनते हैं और ठंड व पाले का आसानी से सामना कर पाते हैं। प्रति हेक्टेयर 100 से 125 किलोग्राम बीज की मात्रा आदर्श मानी जाती है और समय पर बुवाई करने से फसल का जोखिम काफी कम हो जाता है।

बीज उपचार बेहद जरूरी

फसल को सुरक्षित रखने के लिए बुवाई से पहले बीज उपचार करना जरूरी है। इससे पौधे शुरुआत से ही कीटों और बीमारियों से सुरक्षित रहते हैं। ट्राइकोडर्मा, थायरम और कार्बेन्डाजिम जैसी दवाओं से बीज उपचार करने से झुलसा, गलन और दीमक जैसी समस्याओं से बचाव होता है। जिन क्षेत्रों में दीमक की समस्या अधिक है, वहां क्लोरोपायरिफॉस आधारित बीज उपचार करना प्रभावी माना जाता है।

पहली सिंचाई सबसे महत्वपूर्ण

अगेती गेहूं की सिंचाई का सही समय इसकी उपज पर सीधा असर डालता है। बुवाई के 20 से 25 दिन बाद पहली सिंचाई अवश्य करनी चाहिए। उसके बाद फसल की जरूरत के अनुसार हर 20 से 30 दिन के अंतराल पर सिंचाई की जाती है। कल्ले बनते समय, गांठ बनने के समय, बालियां निकलने के दौरान और दाना भरने की अवस्था में सिंचाई फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों को बढ़ाती है। खेत में पानी भरने नहीं देना चाहिए, क्योंकि शुरुआती अवस्था में अत्यधिक पानी नुकसान पहुंचा सकता है।

खरपतवार नियंत्रण आवश्यक

अगेती गेहूं में खरपतवार तेजी से फैलते हैं, जो फसल की पोषक तत्वों पर निर्भरता को प्रभावित करते हैं। यदि इन्हें समय पर नियंत्रित न किया जाए तो उपज में 20 से 30 प्रतिशत तक कमी हो सकती है। बुवाई के 25 से 30 दिन के अंदर खरपतवार नियंत्रण करना सबसे उपयुक्त माना जाता है और इसके लिए क्षेत्र में उपलब्ध उपयुक्त खरपतवारनाशकों का प्रयोग किया जाता है।

NPK और सूक्ष्म पोषक तत्वों का सही संतुलन

अच्छी पैदावार के लिए खाद प्रबंधन बेहद जरूरी है। फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई के समय ही देनी चाहिए। नाइट्रोजन को तीन किस्तों में दिया जाता है जिसमें पहली मात्रा बुवाई के समय, दूसरी पहली सिंचाई के बाद और तीसरी बालियां निकलते समय दी जाती है। जिन क्षेत्रों में सल्फर और जिंक की कमी पाई जाती है वहां इन सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव फसल को अधिक स्वस्थ बनाता है और दाने की गुणवत्ता बढ़ाता है।

अगेती गेहूं से अधिक पैदावार का मौका

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान समय पर बुवाई करें, बीज उपचार और सिंचाई का सही प्रबंधन करें तथा खरपतवार और खाद का संतुलन बनाए रखें, तो अगेती गेहूं से सामान्य गेहूं की तुलना में काफी अधिक पैदावार मिलती है। मोटे दाने, बेहतर गुणवत्ता और मौसम के उतार-चढ़ाव से कम नुकसान होने की वजह से अगेती गेहूं किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित होता है। किसान इन वैज्ञानिक विधियों को अपनाकर आने वाले रबी सीजन में बेहतर उपज और अधिक मुनाफा प्राप्त कर सकते हैं।

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