नई दिल्ली: देश की प्रमुख थोक मंडियों में दालों के भाव में अलग-अलग रुझान देखने को मिल रहे हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से 21 अक्टूबर 2026 तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मसूर और अरहर की कीमतों में पिछले एक साल के दौरान जोरदार बढ़ोतरी हुई है। वहीं, उड़द के भाव में सालाना आधार पर गिरावट दर्ज की गई है, जबकि मूंग की कीमतों में बहुत मामूली बदलाव देखने को मिला है। चने का थोक भाव भी सरकार की ओर से निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी ऊपर बना हुआ है। आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि प्रमुख दालों के बाजार में कीमतों का रुख एक जैसा नहीं है। कुछ दालों के भाव में मासिक और सालाना आधार पर तेजी आई है, जबकि कुछ के दाम अपेक्षाकृत स्थिर हैं। इन बदलावों का असर किसानों की उपज की बिक्री, व्यापारियों के कारोबार और दालों की खरीद करने वाले उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है।
मसूर की कीमतों में एक सप्ताह में 20 प्रतिशत से अधिक उछाल
मसूर की कीमतों में हाल के दिनों में सबसे तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 21 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मसूर का थोक भाव 9,630.15 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गया है। पिछले एक सप्ताह के दौरान इसकी कीमत में 20.40 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। वहीं, एक महीने के आधार पर मसूर 27.73 प्रतिशत महंगी हो चुकी है। सालाना तुलना करें तो इसके भाव में 32.66 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। यह तेजी बताती है कि मसूर के बाजार में हाल के दिनों में कीमतों का दबाव काफी बढ़ा है।
तीन साल में मसूर के भाव में बड़ा बदलाव
वर्ष 2023 में मसूर का औसत भाव 6,229.58 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया था, जबकि अब यह बढ़कर 9,630.15 रुपये प्रति क्विंटल हो गया है। इस तरह तीन साल के अंतराल में इसकी कीमत में लगभग 3,401 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है। किसानों के लिए ऊंचे भाव बेहतर बिक्री मूल्य का अवसर दे सकते हैं, लेकिन इसका लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि उनके पास बिक्री के लिए कितनी उपज उपलब्ध है और स्थानीय मंडी में किस गुणवत्ता की मसूर की मांग है। दूसरी ओर, दाल खरीदने वाले व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में इतनी तेजी खरीद लागत बढ़ा सकती है।
अरहर की कीमतों में सालाना 41 प्रतिशत से अधिक बढ़ोतरी
अरहर, जिसे तूर दाल भी कहा जाता है, के भाव में पिछले एक साल के दौरान बड़ी वृद्धि हुई है। 21 अक्टूबर 2026 को अरहर का थोक भाव 9,292.29 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया। एक साल पहले अक्टूबर 2025 में इसका भाव 6,578.76 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तुलना के आधार पर अरहर की कीमत में 41.24 प्रतिशत की सालाना बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, हाल के सप्ताह के आंकड़ों में कुछ नरमी दिखाई दी है और इसकी कीमत पिछले सप्ताह की तुलना में 3.97 प्रतिशत नीचे आई है।
हालिया गिरावट के बावजूद अरहर के भाव ऊंचे
अरहर की कीमतों में साप्ताहिक गिरावट को सालाना रुझान से अलग करके देखना जरूरी है। एक सप्ताह के दौरान भाव नीचे आने के बावजूद मौजूदा कीमत पिछले साल के मुकाबले काफी अधिक है। इससे स्पष्ट होता है कि बाजार में अल्पकालिक नरमी और लंबे समय की तेजी एक साथ दिखाई दे सकती हैं। किसानों के लिए अरहर की बिक्री का निर्णय लेते समय स्थानीय मंडी के भाव, उपज की गुणवत्ता और उपलब्ध खरीदारों की स्थिति पर ध्यान देना उपयोगी रहेगा। वहीं, दाल कारोबारियों के लिए आगे की कीमतों का आकलन करने में मंडियों से आने वाले नए आंकड़े महत्वपूर्ण होंगे।
चने का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से काफी ऊपर
चने का थोक भाव 21 अक्टूबर 2026 तक 7,074.62 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है। सरकार की ओर से चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,875 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित है। इस तरह मौजूदा थोक भाव समर्थन मूल्य से 1,199.62 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। प्रतिशत के हिसाब से यह अंतर लगभग 20.4 प्रतिशत बैठता है। सालाना आधार पर चने की कीमत में 11.08 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ऊंचे बाजार भाव किसानों के लिए क्या संकेत देते हैं?
जब किसी कृषि उपज का बाजार भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर रहता है, तो किसानों को खुले बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बन सकती है। हालांकि, वास्तविक लाभ किसान की उपज की गुणवत्ता, परिवहन लागत, मंडी शुल्क और स्थानीय खरीद की स्थिति पर भी निर्भर करता है। इसके अलावा, थोक मंडियों में दर्ज भाव और किसान को मिलने वाले वास्तविक बिक्री मूल्य में अंतर हो सकता है। इसलिए चने के ऊंचे भाव को किसानों के लिए सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन प्रत्येक किसान को अपने क्षेत्र की मंडी के ताजा भाव की जानकारी लेकर ही बिक्री का निर्णय करना चाहिए।
उड़द के भाव में सालाना आधार पर 15 प्रतिशत से अधिक गिरावट
अन्य प्रमुख दालों के मुकाबले उड़द की कीमतों में सालाना आधार पर राहत देखने को मिली है। अक्टूबर 2025 में उड़द का थोक भाव 9,289.20 रुपये प्रति क्विंटल था, जो 21 अक्टूबर 2026 तक घटकर 7,879.69 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। इस तरह एक साल के दौरान इसकी कीमत में 15.17 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मौजूदा भाव पिछले साल की तुलना में लगभग 1,410 रुपये प्रति क्विंटल कम है।
उड़द की कीमतों पर नजर रखना क्यों जरूरी है?
उड़द की कीमतों में गिरावट से दाल खरीदने वाले कारोबारियों को अपेक्षाकृत कम भाव पर खरीदारी का अवसर मिल सकता है। हालांकि, किसानों के लिए इसका असर अलग हो सकता है, खासकर उन उत्पादकों के लिए जिन्हें अपनी उपज कम कीमत पर बेचनी पड़ रही है। उड़द के भाव में आगे क्या रुख रहेगा, यह मंडियों में आवक, मांग, उपलब्ध भंडार और व्यापारिक गतिविधियों जैसे कारकों पर निर्भर करेगा। इसलिए केवल सालाना गिरावट के आधार पर भविष्य की कीमतों का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।
मूंग की कीमतों में मामूली बदलाव, भाव लगभग स्थिर
मूंग का थोक भाव 21 अक्टूबर 2026 तक 8,300.33 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज किया गया है। पिछले एक साल के दौरान इसकी कीमत में केवल 0.49 प्रतिशत का बदलाव हुआ है। यह आंकड़ा बताता है कि मसूर और अरहर की तुलना में मूंग के भाव में सालाना आधार पर बहुत कम उतार-चढ़ाव रहा है। हालांकि, किसी दाल का राष्ट्रीय स्तर पर औसत भाव स्थिर रहने का मतलब यह नहीं है कि सभी मंडियों में उसकी कीमत एक जैसी बनी हुई है। अलग-अलग क्षेत्रों में मांग, आवक और उपज की गुणवत्ता के आधार पर स्थानीय भावों में अंतर हो सकता है।
दालों की कीमतों का तुलनात्मक रुझान
21 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर प्रमुख दालों की कीमतों और सालाना बदलाव की स्थिति इस प्रकार है।
| दाल | मौजूदा थोक भाव (रुपये प्रति क्विंटल) | सालाना बदलाव |
|---|---|---|
| मसूर | 9,630.15 | 32.66% की बढ़ोतरी |
| अरहर | 9,292.29 | 41.24% की बढ़ोतरी |
| चना | 7,074.62 | 11.08% की बढ़ोतरी |
| उड़द | 7,879.69 | 15.17% की गिरावट |
| मूंग | 8,300.33 | 0.49% का बदलाव |
इन आंकड़ों से पता चलता है कि अरहर में सालाना प्रतिशत वृद्धि सबसे अधिक दर्ज की गई है, जबकि मसूर की कीमत में हाल के सप्ताह और महीने के दौरान तेज उछाल आया है। चने का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर बना हुआ है। दूसरी ओर, उड़द की कीमत में पिछले साल के मुकाबले गिरावट दर्ज की गई है और मूंग के भाव में अपेक्षाकृत स्थिरता दिखाई दे रही है।
किसानों और उपभोक्ताओं के लिए क्या मायने हैं ये आंकड़े?
दालों की कीमतों में अलग-अलग रुझान किसानों के लिए फसल और बिक्री संबंधी निर्णयों को महत्वपूर्ण बनाते हैं। मसूर और अरहर के ऊंचे भाव इन फसलों के उत्पादकों के लिए बेहतर मूल्य मिलने की संभावना का संकेत दे सकते हैं, जबकि उड़द के दाम में गिरावट किसानों की आमदनी पर दबाव डाल सकती है। चने के मामले में बाजार भाव का न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर रहना खुले बाजार में बिक्री के अवसर को दर्शाता है। हालांकि, वास्तविक लाभ स्थानीय बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
उपभोक्ताओं के लिए मसूर और अरहर की कीमतों में तेजी चिंता का विषय हो सकती है, क्योंकि थोक बाजार में लंबे समय तक ऊंचे भाव बने रहने पर खुदरा कीमतों पर भी असर पड़ सकता है। फिर भी, थोक भाव में बदलाव का खुदरा बाजार पर असर तुरंत और समान रूप से दिखाई दे, यह जरूरी नहीं है। परिवहन, भंडारण, प्रसंस्करण और खुदरा व्यापार की लागत भी अंतिम कीमत को प्रभावित करती है।
कुल मिलाकर, 21 अक्टूबर 2026 तक के आंकड़े दालों के बाजार में मिश्रित रुझान दिखाते हैं। मसूर और अरहर में तेजी, चने के भाव का न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊपर रहना, उड़द में सालाना गिरावट और मूंग की स्थिरता बाजार की अलग-अलग परिस्थितियों को दर्शाती है। किसानों, व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए आगे की दिशा समझने के लिए नियमित रूप से मंडी भाव और नई आवक के आंकड़ों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।
ये भी पढ़ें: बकरियों की प्रमुख बीमारियां, लक्षण और बचाव के उपाय

