मुंबई: महाराष्ट्र मंत्रिमंडल ने मंगलवार को सहकारी चीनी मिलों को आसान शर्तों पर ऋण देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह ऋण वर्ष 2025-26 के गन्ना पेराई सत्र के दौरान किसानों की बकाया उचित एवं लाभकारी कीमत का भुगतान करने और वर्ष 2026-27 में मिलों के संचालन में सहायता के लिए दिया जाएगा। सरकार के इस फैसले से गन्ना किसानों के साथ-साथ आर्थिक दबाव झेल रही चीनी मिलों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।
गन्ना किसानों के बकाये का भुगतान होगा
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई साप्ताहिक मंत्रिमंडल बैठक में यह महत्वपूर्ण फैसला लिया गया। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, आसान ऋण उपलब्ध कराने से चीनी मिलों को किसानों का बकाया भुगतान करने में मदद मिलेगी।
एफआरपी भुगतान को लेकर किसानों की चिंता
गन्ना किसानों के लिए उचित एवं लाभकारी कीमत का मुद्दा लंबे समय से बेहद महत्वपूर्ण रहा है। किसान संगठन लगातार मांग करते रहे हैं कि गन्ने की कीमत खेती की बढ़ती लागत और चीनी उद्योग से होने वाली आय के अनुरूप बढ़ाई जाए। वर्तमान में महाराष्ट्र की अधिकांश चीनी मिलों ने वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र की उचित एवं लाभकारी कीमत का भुगतान कर दिया है। हालांकि कुछ मिलों पर अभी भी किसानों का बकाया है। ऐसे में आसान ऋण की मंजूरी से बकाया राशि चुकाने की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है।
99 प्रतिशत से अधिक एफआरपी का भुगतान
वर्ष 2025-26 के पेराई सत्र के लिए महाराष्ट्र की चीनी मिलों ने कुल उचित एवं लाभकारी कीमत की लगभग 99.37 प्रतिशत राशि किसानों को चुका दी है। यह राशि 40,190 करोड़ रुपये से अधिक बताई गई है।
कुछ मिलों पर अब भी करोड़ों रुपये बकाया
भुगतान का बड़ा हिस्सा हो जाने के बावजूद कुछ चीनी मिलें अभी तक किसानों का पूरा बकाया नहीं चुका पाई हैं। ऐसी मिलों पर करीब 256 करोड़ रुपये की राशि बकाया बताई गई है। सरकार की ओर से आसान ऋण दिए जाने के फैसले को इसी बकाये को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बारिश और बाढ़ की स्थिति पर भी सरकार की नजर
मंत्रिमंडल बैठक के दौरान राज्य में बारिश की स्थिति पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बताया कि प्रत्येक जिले से बारिश की स्थिति को लेकर प्रस्तुतीकरण लिया गया है।
संकट वाले जिलों में पहले से तैयारी
मुख्यमंत्री के अनुसार, जिन क्षेत्रों में बारिश के कारण कमी या संकट की स्थिति दिखाई दे रही है, वहां पहले से तैयारी शुरू कर दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आपदा संबंधी नियमों के तहत पांच अक्टूबर तक सर्वेक्षण किया जा सकता है, लेकिन सरकार नुकसान के आकलन के लिए उस तारीख तक इंतजार नहीं करेगी। सरकार का कहना है कि प्रभावित किसानों को उनके हाल पर नहीं छोड़ा जाएगा और जरूरत के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने के लिए समय रहते कदम उठाए जाएंगे।
महाराष्ट्र तकनीकी सहायता प्रकोष्ठ बनाने को मंजूरी
मंत्रिमंडल ने एक अन्य महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले में महाराष्ट्र तकनीकी सहायता प्रकोष्ठ बनाने को भी मंजूरी दी है। इसका उद्देश्य राज्य सरकार की 25 प्रमुख नीतियों और 25 महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं का मूल्यांकन करना है।
योजनाओं के कामकाज का होगा मूल्यांकन
यह एक वर्ष की मूल्यांकन परियोजना होगी। इसके तहत सरकारी नीतियों और कल्याणकारी योजनाओं के कामकाज, प्रभाव और निर्णय लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाने के लिए अध्ययन किया जाएगा। मूल्यांकन के लिए मुंबई स्थित भारतीय प्रबंध संस्थान और योजनाओं तथा नीतियों के क्षेत्र में काम करने वाली संस्था की सिफारिशों का आधार लिया जाएगा।
नासिक में साहित्य परिषद को मिली राहत
मंत्रिमंडल ने नासिक नगर निगम के स्वामित्व वाली अध्ययन केंद्र और पुस्तकालय की इमारत के पट्टा समझौते पर लगने वाले मुद्रांक शुल्क में छूट को भी मंजूरी दी है।
साहित्य परिषद की नासिक शाखा को दी गई है इमारत
यह इमारत महाराष्ट्र साहित्य परिषद की नासिक शाखा को पट्टे पर दी गई है। मुद्रांक शुल्क में छूट मिलने से संबंधित संस्था को आर्थिक राहत मिलने की उम्मीद है।
आर्वी में सरकारी जमीन नगर परिषद को मुफ्त देने का फैसला
मंत्रिमंडल ने वर्धा जिले के आर्वी तालुका में 6,240.30 वर्ग मीटर सरकारी जमीन स्थानीय नगर परिषद को मुफ्त में देने की मंजूरी दी है। इस जमीन का उपयोग वाणिज्यिक परिसर के निर्माण के लिए किया जाएगा।
भूमि से जुड़े कानूनों में भी संशोधन
महाराष्ट्र नगर परिषद, नगर पंचायत और औद्योगिक नगर अधिनियम, 1965 में संशोधन को भी मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी है। इसके अलावा महाराष्ट्र कृषि भूमि जोत की अधिकतम सीमा अधिनियम, 1961 में संशोधन पारित किया गया। इस संशोधन के बाद अहिल्यानगर जिले के हरेगांव गांव में राज्य कृषि निगम की जमीन उसके मूल मालिकों को वापस करने का रास्ता साफ होगा।
पुलिस आवास परियोजना के लिए भी मंजूरी
मंत्रिमंडल ने चार प्रशासनिक पदों के सृजन को भी मंजूरी दी है। इसके साथ ही मुंबई पुलिस आवास एवं नगर परियोजना के अध्यक्ष कार्यालय के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता को स्वीकृति दी गई है।
एफआरपी बढ़ाने की मांग पर किसानों का आंदोलन तेज
केंद्र सरकार की ओर से उचित एवं लाभकारी कीमत में हालिया बढ़ोतरी के बावजूद महाराष्ट्र के कई किसान संगठन इससे संतुष्ट नहीं हैं। किसान संगठनों का तर्क है कि उत्पादन, खाद, बीज, मजदूरी और परिवहन की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि गन्ने की कीमत में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हुई है।
सोलापुर क्षेत्र में बड़े आंदोलन की तैयारी
सोलापुर और आसपास के क्षेत्रों में किसान संगठन उचित एवं लाभकारी कीमत को लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि चीनी के दाम बढ़ने और चीनी मिलों की आय में बढ़ोतरी के बावजूद गन्ना उत्पादकों को उसका पर्याप्त लाभ नहीं मिल रहा है। किसानों का दावा है कि खेती की लागत जिस तेजी से बढ़ रही है, उसके मुकाबले उनकी वास्तविक आय में बहुत कम वृद्धि हुई है। इसलिए किसान सरकार से गन्ने की उचित एवं लाभकारी कीमत में जल्द बढ़ोतरी करने और किसानों को उनकी लागत के अनुरूप बेहतर मूल्य दिलाने की मांग कर रहे हैं।
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