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पंजाब में नए खरपतवार का खतरा, बाढ़ के बाद बदला खेती तंत्र

Punjab weed infestation

चंडीगढ़: पंजाब में हाल के वर्षों में आई बाढ़ के बाद अब किसानों के सामने एक नई चुनौती उभरकर आई है। राज्य के कई जिलों में वैज्ञानिकों ने ऐसी खरपतवार प्रजातियों की पहचान की है, जो पहले इन क्षेत्रों में नहीं पाई जाती थीं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव कृषि पारिस्थितिकी तंत्र पर चरम मौसम घटनाओं के असर को दर्शाता है।

सर्वे में सामने आया खरपतवार पैटर्न में बदलाव

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए सर्वे में होशियारपुर, गुरदासपुर, पठानकोट, रूपनगर, अमृतसर और पटियाला जिलों में खरपतवार की संरचना में बदलाव दर्ज किया गया। वर्ष 2023 और 2025 की बाढ़ के बाद किए गए अध्ययन में खेतों के भीतर और आसपास नई प्रजातियों की मौजूदगी पाई गई।

तीन नई खरपतवार प्रजातियों की पहचान

अध्ययन के दौरान तीन नई खरपतवार प्रजातियां सामने आई हैं, जिनमें जंगली मूली, जल धनिया और मार्श येलो क्रेस शामिल हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार बाढ़ के दौरान ऊपरी इलाकों से बहकर आए बीज और वनस्पति अवशेषों के कारण इन प्रजातियों का प्रवेश हुआ है। कुछ क्षेत्रों में इन खरपतवारों को फसलों के बीच भी देखा गया, जिससे इनके स्थायी रूप से फैलने की आशंका बढ़ गई है।

फसलों के लिए बढ़ सकता है खतरा

विशेषज्ञों का कहना है कि ये खरपतवार फसलों के साथ पोषक तत्व, पानी, धूप और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। इसके अलावा ये कीटों और रोगों के वाहक के रूप में भी काम कर सकती हैं, जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है।

जलवायु परिवर्तन का दिख रहा असर

विश्वविद्यालय के कुलपति सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और चरम मौसम घटनाएं कृषि तंत्र को तेजी से बदल रही हैं। नई खरपतवार प्रजातियों की अनुकूलन क्षमता और फैलाव को लेकर अभी पर्याप्त जानकारी नहीं है, इसलिए निरंतर निगरानी बेहद जरूरी है।

किसानों को दी गई सतर्कता की सलाह

विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने किसानों से अपील की है कि वे अपने खेतों में किसी भी नई या असामान्य खरपतवार को नजरअंदाज न करें। यदि कोई नया पौधा दिखाई दे, तो उसकी जानकारी तुरंत कृषि विशेषज्ञों या संबंधित विभाग को दें, ताकि समय रहते नियंत्रण के उपाय किए जा सकें। बाढ़ के बाद उभरती यह नई समस्या किसानों के लिए चेतावनी है कि बदलते मौसम के साथ खेती के तरीकों और निगरानी में भी बदलाव जरूरी हो गया है।

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