नई दिल्ली: देश के 11 राज्यों में चार मार्च से रबी मौसम की गेहूं खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन इस बीच मध्य प्रदेश के आंकड़ों को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार के पोर्टल के अनुसार पांच मई की सुबह तक मध्य प्रदेश में गेहूं का एक दाना भी नहीं खरीदा गया है, जबकि राज्य सरकार इसके विपरीत लगातार खरीद होने का दावा कर रही है। इस अंतर ने खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता पर चर्चा तेज कर दी है।
लक्ष्य के मुकाबले धीमी खरीद
देशभर में गेहूं खरीद के लिए 3.45 करोड़ टन का लक्ष्य तय किया गया है, जिसमें से चार मई तक लगभग 1.39 करोड़ टन गेहूं की ही खरीद हो पाई है। यानी लक्ष्य का आधा आंकड़ा भी अभी तक नहीं छुआ जा सका है। 37 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है, लेकिन अब तक केवल 10.58 लाख किसानों से ही गेहूं खरीदा गया है। इससे साफ है कि कई राज्यों में खरीद की रफ्तार अपेक्षा से धीमी है।
मध्य प्रदेश के आंकड़ों में विरोधाभास
मध्य प्रदेश में एक करोड़ टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है और इसके लिए 15 मार्च से 30 जून तक का समय तय किया गया है। राज्य में 3585 खरीद केंद्र बनाए गए हैं। हालांकि केंद्र के पोर्टल के अनुसार अब तक कोई खरीद दर्ज नहीं हुई है, जबकि राज्य सरकार का कहना है कि किसानों से नियमित रूप से गेहूं खरीदा जा रहा है। इस विरोधाभास ने आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पंजाब में लक्ष्य के करीब पहुंची खरीद
पंजाब में एक अप्रैल से 15 मई तक गेहूं खरीद की जा रही है और यहां 1.22 करोड़ टन का लक्ष्य रखा गया है। चार मई तक 1.05 करोड़ टन गेहूं खरीदा जा चुका है। राज्य में 9.64 लाख किसानों से खरीद होनी है, जिसमें से अब तक 6.88 लाख किसानों से खरीद पूरी हो चुकी है। यहां 2806 केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से अधिकांश पर खरीद जारी है।
हरियाणा और उत्तर प्रदेश की स्थिति
हरियाणा में 72 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है। चार मई तक राज्य में बड़ी मात्रा में खरीद दर्ज की गई है, लेकिन किसानों की भागीदारी अभी भी सीमित है। उत्तर प्रदेश में 25 करोड़ टन के लक्ष्य के मुकाबले लगभग 7.78 करोड़ टन गेहूं की खरीद हुई है और 1.38 लाख किसानों से खरीद की गई है। दोनों राज्यों में भी खरीद प्रक्रिया जारी है, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने में समय लग सकता है।
खरीद केंद्रों पर सीमित पहुंच
देशभर में 18483 खरीद केंद्र बनाए गए हैं, लेकिन अभी तक केवल 9765 केंद्रों पर ही किसान गेहूं बेचने पहुंचे हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि कई क्षेत्रों में किसानों की पहुंच या भागीदारी सीमित है। पिछले वर्ष भी इसी तरह की स्थिति देखने को मिली थी, जब तय लक्ष्य के मुकाबले कम खरीद हुई थी।
समय सीमा नजदीक, बढ़ी चिंता
कुछ राज्यों में गेहूं खरीद की अंतिम तिथि 15 मई निर्धारित है, जबकि अन्य राज्यों में 30 जून तक खरीद जारी रहेगी। ऐसे में लक्ष्य और वास्तविक खरीद के बीच का अंतर चिंता बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खरीद प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई, तो किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का पूरा लाभ नहीं मिल पाएगा और सरकारी भंडारण लक्ष्य भी प्रभावित हो सकता है।
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