नई दिल्ली: केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई में इस वर्ष वृद्धि दर्ज की गई है। एक मई 2026 तक कुल 81.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा 79.00 लाख हेक्टेयर था। इस तरह कुल मिलाकर 2.60 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, सभी फसलों में समान रुझान नहीं है और कुछ प्रमुख फसलों में गिरावट भी देखने को मिली है।
धान की बुवाई में कमी
आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष धान की बुवाई में गिरावट दर्ज की गई है। जहां पिछले वर्ष 32.42 लाख हेक्टेयर में धान की खेती हुई थी, वहीं इस बार यह घटकर 31.05 लाख हेक्टेयर रह गई है। यानी धान के रकबे में 1.36 लाख हेक्टेयर की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौसम की अनिश्चितता और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए किसानों ने कई क्षेत्रों में वैकल्पिक फसलों की ओर रुख किया है।
दालों की खेती में बढ़त
दालों की कुल बुवाई में इस वर्ष 0.73 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। इस बार 23.49 लाख हेक्टेयर में दालों की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 22.76 लाख हेक्टेयर थी। उड़द की खेती में 0.62 लाख हेक्टेयर की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जबकि मूंग की खेती लगभग स्थिर बनी हुई है। अन्य दालों में भी हल्की बढ़त देखने को मिली है।
श्री अन्न और मोटे अनाज का बढ़ता रुझान
सरकार द्वारा प्रोत्साहित श्री अन्न और मोटे अनाज की खेती में इस वर्ष तेज वृद्धि देखी गई है। कुल रकबा बढ़कर 16.01 लाख हेक्टेयर हो गया है, जो पिछले वर्ष 14.25 लाख हेक्टेयर था। इस प्रकार 1.77 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेष रूप से मक्का की खेती में 1.50 लाख हेक्टेयर की बड़ी बढ़ोतरी हुई है, जबकि बाजरा और रागी में भी इजाफा हुआ है। यह संकेत देता है कि किसान अब कम पानी वाली और बेहतर बाजार मांग वाली फसलों की ओर बढ़ रहे हैं।
तिलहनों की खेती में उछाल
तिलहनों की बुवाई में भी इस वर्ष अच्छी वृद्धि देखी गई है। कुल रकबा बढ़कर 11.04 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि पिछले वर्ष यह 9.58 लाख हेक्टेयर था। यानी 1.47 लाख हेक्टेयर की वृद्धि दर्ज की गई है। इसमें मूंगफली की खेती में सबसे ज्यादा 1.31 लाख हेक्टेयर का इजाफा हुआ है, जबकि तिल और सूरजमुखी में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
फसल विविधीकरण की ओर बढ़ते किसान
कुल मिलाकर आंकड़े यह संकेत देते हैं कि किसान अब फसल विविधीकरण की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। धान की खेती में कमी के बावजूद दालों, मोटे अनाज और तिलहनों में बढ़ोतरी यह दर्शाती है कि किसान पोषण, जल संरक्षण और बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए फसल चयन कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौसम अनुकूल बना रहा, तो इस वर्ष ग्रीष्मकालीन फसलों का उत्पादन संतोषजनक रह सकता है और किसानों की आमदनी में भी सुधार संभव है।
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