नई दिल्ली: सरकार पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण की मात्रा बढ़ाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। वर्तमान में देश में पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल मिलाया जा रहा है, जिसे वर्ष 2030 तक बढ़ाकर 30 प्रतिशत करने की योजना है। इसी दिशा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 27 अप्रैल को मोटर वाहन अधिनियम के तहत एक प्रारूप अधिसूचना जारी की है। इस प्रारूप में केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि 85 प्रतिशत और 100 प्रतिशत इथेनॉल ईंधन पर चलने वाले वाहनों के लिए स्पष्ट नियम बनाए जा सकें। इससे भविष्य में ऐसे वाहन बाजार में उपलब्ध हो सकेंगे, जो अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर संचालित होंगे।
इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने के पीछे सरकार की रणनीति
सरकार का मानना है कि इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने से (30 प्रतिशत) कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित तेल से पूरा करता है, जो आर्थिक दबाव का कारण बनता है। पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इथेनॉल मिश्रित ईंधन से कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होता है, जिससे वायु प्रदूषण में कमी आती है। इथेनॉल एक जैव ईंधन है, जिसे गन्ना, मक्का और कृषि अवशेषों से तैयार किया जाता है, इसलिए इसे पर्यावरण के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है।
चुनौतियां और उठते सवाल
हालांकि, इथेनॉल मिश्रण को लेकर कई चिंताएं भी सामने आ रही हैं। सबसे बड़ी चिंता पानी की खपत को लेकर है, क्योंकि गन्ने की खेती में अत्यधिक पानी की आवश्यकता होती है। यदि इथेनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए गन्ने की खेती का विस्तार होता है, तो जल संकट और गंभीर हो सकता है। इथेनॉल उत्पादन प्रक्रिया के दौरान बनने वाला उपउत्पाद भी एक चुनौती है। यदि इसका सही तरीके से निस्तारण नहीं किया गया, तो यह मिट्टी और जल स्रोतों को प्रदूषित कर सकता है।
खेती और पर्यावरण पर संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि इथेनॉल के लिए फसलों की मांग बढ़ने से कृषि भूमि का स्वरूप बदल सकता है। इससे खाद्य फसलों का रकबा कम होने और खाद्य सुरक्षा पर असर पड़ने की आशंका है। साथ ही, जंगलों की भूमि पर खेती बढ़ने से जैव विविधता को नुकसान पहुंच सकता है।
समाधान के लिए विशेषज्ञों के सुझाव
विशेषज्ञों का कहना है कि इथेनॉल को वास्तव में पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए कच्चे माल के स्रोतों में विविधता लानी होगी। कृषि अवशेष और अन्य वैकल्पिक संसाधनों से इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना जरूरी है। इसके साथ ही, उत्पादन प्रक्रिया पर सख्त पर्यावरणीय निगरानी और कम पानी वाली टिकाऊ खेती को प्रोत्साहित करना आवश्यक होगा। इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की योजना ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है, लेकिन इसके सफल क्रियान्वयन के लिए सतत और संतुलित नीति अपनाना जरूरी होगा।
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