कृषि समाचार

खरीफ सीजन से पहले खाद की कीमत नियंत्रित करने की तैयारी

Inspection-free system

नई दिल्ली: खरीफ सीजन की तैयारियों के बीच देश में खाद कंपनियां कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए नई व्यवस्था पर विचार कर रही हैं। रिपोर्ट के अनुसार अब डाइ-अमोनियम फॉस्फेट, म्यूरेट ऑफ पोटाश और कॉम्प्लेक्स खाद के आयात अनुबंधों में न्यूनतम और अधिकतम कीमत तय करने की योजना बनाई जा रही है।

कीमतों की अस्थिरता से बढ़ी चिंता

वैश्विक बाजार में खाद की कीमतों में बार-बार हो रहे बदलाव से कंपनियों के सामने लागत का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार पर सप्लायर का ज्यादा नियंत्रण होने के कारण जोखिम और बढ़ जाता है, ऐसे में नई व्यवस्था जरूरी हो गई है।

क्या होगी नई व्यवस्था

नई योजना के तहत आयात अनुबंधों में न्यूनतम और अधिकतम कीमत तय की जाएगी। इससे कीमत बहुत ज्यादा बढ़ने या गिरने की स्थिति में कंपनियों को सुरक्षा मिलेगी और लागत नियंत्रण में रहेगी।

अभी अनुबंध पर नहीं बन रही सहमति

हालांकि कंपनियां फिलहाल नए अनुबंध करने में जल्दबाजी नहीं कर रही हैं। मौजूदा वैश्विक कीमतों को देखते हुए यह तय करना कठिन हो रहा है कि न्यूनतम और अधिकतम सीमा क्या रखी जाए, इसलिए कई कंपनियां नए वित्तीय वर्ष तक इंतजार कर रही हैं।

यूरिया आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता

यूरिया की आपूर्ति को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। हाल में कोई नया टेंडर जारी नहीं हुआ है और आयात में देरी की आशंका बनी हुई है। इससे आने वाले समय में उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

अन्य खाद भी हुए महंगे

डाइ-अमोनियम फॉस्फेट और म्यूरेट ऑफ पोटाश की अंतरराष्ट्रीय कीमतें भी काफी बढ़ गई हैं, जिससे आयात लागत में इजाफा हो रहा है। इसका असर घरेलू बाजार पर भी पड़ सकता है।

सरकार ने स्टॉक को बताया पर्याप्त

सरकार का दावा है कि देश में खाद का भंडार पिछले साल की तुलना में बेहतर स्थिति में है। हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि गैस की कमी के कारण घरेलू उत्पादन प्रभावित हो सकता है, जिससे आगे चलकर आपूर्ति पर दबाव बन सकता है।

खरीफ सीजन में बढ़ सकती है चुनौती

आने वाले खरीफ सीजन में खाद की मांग बढ़ने की संभावना है। अगर समय पर पर्याप्त आपूर्ति नहीं हो पाई, तो किसानों को दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में कीमत नियंत्रण और आपूर्ति सुनिश्चित करना सरकार और कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। कुल मिलाकर खाद की कीमतों और आपूर्ति को संतुलित रखने के लिए नई रणनीति पर काम तेज हो गया है, जिससे किसानों को राहत देने की कोशिश की जा रही है।

ये भी पढ़ें: होर्मुज संकट से खाद की किल्लत, खेती और खाद्य सुरक्षा पर खतरा

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