चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों की मदद के लिए बनाए गए हरियाणा ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर फसलों का ब्योरा दर्ज कराने की अंतिम तिथि आज 15 सितंबर निर्धारित की है। सरकार ने पहले यह समयसीमा बढ़ाई थी ताकि अधिक से अधिक किसान अपनी खराब हुई फसलों का डाटा अपलोड कर सकें। करनाल जिले में अब तक 1876 किसानों ने 14,595 एकड़ फसल खराब होने का विवरण दर्ज कराया है। कृषि विभाग का कहना है कि वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद किसानों को जल्द मुआवजा दिया जाएगा।
किसानों को मिलेगा सीधा लाभ
करनाल के कृषि उप निदेशक वजीर सिंह ने बताया कि बाढ़ से प्रभावित किसानों की फसलों का मुआवजा जल्द दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य है कि सही नुकसान का आंकड़ा सामने आए और किसानों को उनकी मेहनत का उचित हक मिले। वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद 5 से 7 दिनों के भीतर राशि सीधे किसानों के खाते में भेज दी जाएगी।
करनाल में यमुना तट से सटे गांव सबसे प्रभावित
जिले में यमुना तट से सटे गांवों में सबसे ज्यादा फसलों को नुकसान हुआ है। कई एकड़ धान और अन्य खरीफ फसलें बाढ़ के पानी में डूब गईं। अब तक 1876 किसानों ने पोर्टल पर आवेदन कर दिया है और उम्मीद है कि बाकी किसान भी अंतिम दिन तक अपना ब्योरा दर्ज कर देंगे।
हरियाणा ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल के जरिये कैसे मिलेगा मुआवजा?
कृषि उप निदेशक ने स्पष्ट किया कि किसान को पहले ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ पोर्टल पर पंजीकरण कराना जरूरी है। इसके बाद ही किसान ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपनी खराब हुई फसल का विवरण दर्ज कर सकते हैं। दोनों पोर्टल आपस में लिंक हैं और इससे डाटा सही तरीके से रिकॉर्ड हो पाता है।
सरकार का मकसद
सरकार का कहना है कि ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल का मकसद यही है कि किसान अपने नुकसान का ब्योरा स्वयं दर्ज करें ताकि पारदर्शिता बनी रहे और समय पर मुआवजा दिया जा सके। वजीर सिंह ने बताया कि संबंधित विभागों द्वारा फसलों की जांच चल रही है और जल्द ही सभी प्रभावित किसानों को राहत राशि उपलब्ध कराई जाएगी।
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