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National Conference on Quality Agri Inputs 2025: नकली कृषि उत्पादों पर सख्ती की मांग

National Conference on Quality Agri Inputs 2025

नई दिल्ली: भारतीय कृषि क्षेत्र के सामने खड़ी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक स्प्यूरियस (नकली) एग्री इनपुट्स है, जो किसानों की मेहनत और देश की खाद्य सुरक्षा को सीधे प्रभावित करते हैं। इसी गंभीर मुद्दे पर चर्चा और समाधान खोजने के लिए इंडियन चैंबर ऑफ फूड एंड एग्रीकल्चर (ICFA) ने शुक्रवार को “National Conference on Quality Agri Inputs” का आयोजन नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में किया। इस कॉन्फ्रेंस का विषय था  “Addressing the Challenge of Spurious Inputs in Indian Agriculture”। इसमें नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों, किसान संगठनों और अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया।

नकली कृषि उत्पादों से बढ़ रही किसानों की परेशानी

कृषि इनपुट्स जैसे बीज, खाद, कीटनाशक और बायो-स्टिम्युलेंट्स की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, हर साल बड़ी संख्या में किसान नकली बीज और निम्न गुणवत्ता वाले खाद-कीटनाशक खरीदने के कारण फसल उत्पादन में नुकसान झेलते हैं। कई बार नकली उत्पादों के कारण फसलें समय पर तैयार नहीं हो पातीं, कीट और रोगों का प्रकोप बढ़ जाता है और किसान कर्ज के बोझ में दब जाते हैं। इस वजह से किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक, नकली इनपुट्स की वजह से हर साल लाखों किसान आर्थिक नुकसान झेलते हैं।

ICFA का जोर: क्वालिटी इनपुट्स ही टिकाऊ कृषि की कुंजी

ICFA के डायरेक्टर जनरल डॉ. तरुण श्रीधर ने अपने संबोधन में कहा कि क्वालिटी एग्री इनपुट्स कृषि उत्पादन की बुनियाद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसानों को नकली या घटिया गुणवत्ता वाले इनपुट्स मिलेंगे तो न केवल उनकी आमदनी प्रभावित होगी बल्कि देश की फूड सिक्योरिटी और न्यूट्रिशन सिक्योरिटी भी खतरे में पड़ जाएगी। उन्होंने कहा कि यह समय है जब सरकार, उद्योग और किसानों को मिलकर नकली उत्पादों की सप्लाई चेन को तोड़ना होगा और सख्त कानून लागू करने होंगे। ICFA की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, संगठन लगातार नीति निर्माताओं और उद्योग के साथ मिलकर किसानों को असली उत्पाद उपलब्ध कराने पर काम कर रहा है।

पांच थीमैटिक सेशंस में हुई विस्तृत चर्चा

कॉन्फ्रेंस के दौरान दिनभर पांच फोकस सेशंस आयोजित किए गए। इनमें “From Counterfeit to Confidence” और “Sustainable Growth & Impact on Farming Communities” जैसे विषय शामिल थे। इन सेशंस में कई दिग्गज विशेषज्ञ और इंडस्ट्री लीडर्स जुड़े, जिनमें धानुका एग्रीटेक लिमिटेड के चेयरमैन एमेरिटस डॉ. आर. जी. अग्रवाल, एनबीआईएफ के सेक्रेटरी जनरल साहिल मलिक, एफएसआईआई के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर राघवन संपत्कुमार, एशिया एंड पैसिफिक सीड एसोसिएशन के पूर्व निदेशक डॉ. नरेंद्र डडलानी और एसीएफआई के डायरेक्टर जनरल डॉ. कल्याण बल्लव गोस्वामी समेत अन्य विशेषज्ञ शामिल थे।

चर्चाओं का मुख्य फोकस क्वालिटी स्टैंडर्ड्स, कंप्लायंस मैकेनिज्म, ट्रेसबिलिटी टेक्नोलॉजी, वैल्यू चेन की पारदर्शिता और किसानों की जागरूकता पर रहा।

इन सेशंस में विशेषज्ञों ने सुझाव दिए कि कृषि इनपुट्स की सप्लाई चेन को पारदर्शी बनाया जाए, किसानों को नकली और असली उत्पाद की पहचान करने के लिए ट्रेनिंग दी जाए और डिजिटल टेक्नोलॉजी जैसे QR कोड और ब्लॉकचेन का उपयोग बढ़ाया जाए।

पोजीशन पेपर होगा जारी

ICFA ने घोषणा की कि इस कॉन्फ्रेंस के निष्कर्षों और चर्चाओं के आधार पर एक पोज़िशन पेपर तैयार किया जाएगा। इसमें सरकार और उद्योग जगत के लिए ठोस सिफारिशें होंगी, जैसे रेगुलेटरी सुधार, क्वालिटी कंट्रोल टेक्नोलॉजी, सप्लाई चेन मॉनिटरिंग और किसान-केंद्रित कार्यक्रम।

इंडस्ट्री और किसानों की अपेक्षाएं

ICFA के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर विवेक माथुर ने कहा कि किसानों को सुरक्षित और असली कृषि इनपुट्स उपलब्ध कराना अब कोई विकल्प नहीं बल्कि अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि यदि किसान सही बीज और खाद का इस्तेमाल करेंगे तो उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बेहतर होगी, जिससे उनकी आय बढ़ेगी और खेती में टिकाऊपन आएगा।

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