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यूपी: नई गन्ना सट्टा एवं आपूर्ति नीति जारी, छोटे किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों के लिए अच्छी खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने पेराई सत्र 2025-26 के लिए नई गन्ना सट्टा एवं आपूर्ति नीति जारी कर दी है। इस बार सरकार ने छोटे, अति लघु और महिला गन्ना किसानों को प्राथमिकता देते हुए कई बड़े बदलाव किए हैं। नई नीति के मुताबिक, गन्ना समिति के नये किसान सदस्यों को सट्टा पेराई सत्र 2024-25 में संबंधित चीनी मिल की औसत गन्ना आपूर्ति या जिले की गन्ना उत्पादकता का 70% (जो अधिक हो) तक गन्ना सट्टा का लाभ मिलेगा। इससे किसानों को अपनी उपज का उचित दाम और समय पर भुगतान मिल सकेगा।

छोटे गन्ना किसानों (81 क्विंटल सट्टाधारक) को पेड़ी गन्ने की पर्चियां एक से तीन पक्ष में और पौधे गन्ने की पर्चियां सात से नौ पक्ष में जारी करने की सुविधा दी गई है। अति लघु गन्ना किसानों (36 क्विंटल) और लघु महिला किसानों (81 क्विंटल) के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। अति लघु किसानों को शत-प्रतिशत पेड़ी गन्ने की पर्चियां प्रथम पक्ष में और पौधे की पर्चियां सातवें पक्ष में दी जाएंगी, जबकि लघु महिला किसानों को पेड़ी गन्ने की पर्चियां एक से तीन पक्ष में और पौधे गन्ने की पर्चियां सात से नौ पक्ष में मिलेंगी। सरकार का अनुमान है कि इससे 13.12 लाख छोटे, 3.75 लाख अति लघु और 6,268 लघु महिला किसान लाभांवित होंगे।

बड़े किसानों के लिए भी नीति में अहम प्रावधान किए गए हैं। गन्ना शोध परिषद की किस्म को.15023 को प्राथमिकता देते हुए इसकी पेड़ी पर्चियां एक से दो पक्ष में और पौधे की पर्चियां सात से आठ पक्ष में जारी होंगी। इस बदलाव से चीनी की रिकवरी बढ़ेगी और किसानों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित होगा। वहीं, नए समिति सदस्यों की पेड़ी और शरदकालीन पौधे वाली पर्चियां पहली बार पांचवें पक्ष से 12वें पक्ष तक जारी करने की सुविधा दी जाएगी। नई नीति में यह भी प्रावधान है कि 2,500 क्विंटल या उससे अधिक सट्टा धारक किसानों के एक कालम में अधिकतम आठ पर्चियां लगाई जा सकती हैं, जबकि अन्य किसानों को सामान्य कैलेंडर में अधिकतम चार पर्चियों की सुविधा होगी। जिन किसानों के पास शत-प्रतिशत पेड़ी गन्ना है, उनकी 52% पर्चियां छठवें पखवाड़े तक और शेष 48% पर्चियां सातवें से 10वें पखवाड़े तक अंकित की जाएंगी।

पेराई सत्र 2025-26 में पहली बार यांत्रिक हार्वेस्टिंग के लिए आवेदन करने वाले किसानों को पारिवारिक कैलेंडर की सुविधा भी दी जाएगी। यह कदम मजदूरों की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए राहत साबित होगा। वहीं, जिन किसानों ने केवल पेराई सत्र 2024-25 में ही गन्ना आपूर्ति की थी, उनके कोटा का निर्धारण औसत आपूर्ति या उस वर्ष की आपूर्ति (जो अधिक हो) के आधार पर किया जाएगा। कुल मिलाकर, योगी सरकार की नई गन्ना सट्टा एवं आपूर्ति नीति का उद्देश्य चीनी मिलों को समय पर गन्ना उपलब्ध कराना और किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना है। इससे गन्ना उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आमदनी में भी इजाफा होगा।

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