कृषि समाचार

छत्तीसगढ़ के किसानों को बड़ी राहत, केंद्र सरकार ने धान खरीदी का लक्ष्य 8 लाख टन बढ़ाया

छत्तीसगढ़ के धान उत्पादक किसानों के लिए एक बड़ी खुशखबरी सामने आई है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 के लिए केंद्रीय पूल के तहत धान खरीदी के लक्ष्य में 8 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी की है। अब केंद्र सरकार राज्य से 70 लाख मीट्रिक टन की जगह 78 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी करेगी। इस ऐतिहासिक निर्णय को लेकर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय खाद्य एवं उपभोक्ता मंत्री प्रह्लाद जोशी का आभार जताया है। मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के किसानों के लिए खुशी का विषय बताया। मुख्यमंत्री साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए लिखा कि केंद्र सरकार का यह फैसला छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति को सशक्त करेगा और राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा देगा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की सतत कोशिशों के परिणामस्वरूप ही यह अतिरिक्त 8 लाख मीट्रिक टन चावल खरीदी की मंजूरी संभव हो सकी है।

किसानों को मिलेगा 3100 रुपये प्रति क्विंटल का भाव

खरीफ मार्केटिंग वर्ष 2024-25 के लिए छत्तीसगढ़ में किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के तहत प्रति क्विंटल सामान्य धान के लिए 2,300 रुपये और राज्य सरकार की ओर से 800 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस दिया जा रहा है। इस तरह किसानों को कुल 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर मिल रही है। वहीं ग्रेड ए धान का एमएसपी 2,320 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। इस निर्णय से किसानों को न केवल फसल की अच्छी कीमत मिलेगी, बल्कि सरकारी खरीदी से उनकी आमदनी भी सुनिश्चित होगी।

खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की तैयारी

सरकार ने इस बार खरीदी प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, सुगठित और समयबद्ध बनाने के लिए रणनीति तैयार की है। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों को समय पर भुगतान और बेहतर सेवा सुनिश्चित करने के लिए सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं। यह निर्णय न केवल किसानों के आत्मविश्वास को बढ़ाता है, बल्कि यह केंद्र सरकार की ओर से उनके परिश्रम और उत्पादन क्षमता में भरोसे का संकेत भी है।

कृषि को मजबूती देने की दिशा में लगातार प्रयास

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार किसानों की समृद्धि के लिए लगातार प्रयासरत है। नई योजनाओं और सहकारी प्रयासों के माध्यम से खेती-किसानी को सम्मान और स्थायित्व देने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि किसानों की भलाई और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना ही उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। छत्तीसगढ़ में धान को ‘जीवन की धारा’ माना जाता है और बड़ी संख्या में किसान इसकी खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में केंद्र सरकार का यह फैसला न केवल आर्थिक रूप से राहत देगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान करेगा। अब उम्मीद की जा रही है कि अधिक किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिलेगा और वे सरकार की खरीदी नीति पर और अधिक विश्वास कर सकेंगे।

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