खेती-किसानी

भारत में तेजी से बढ़ रही मशरूम की मांग, जानिए कौन सी हैं सबसे अच्छी किस्में

नई दिल्ली: भारतीय रसोई में अब सिर्फ पारंपरिक सब्जियां ही नहीं, बल्कि पोषण और स्वाद से भरपूर सुपरफूड भी अपनी जगह बना रहे हैं। उन्हीं में से एक है मशरूम, जिसकी मांग इन दिनों देश में तेजी से बढ़ रही है। शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह के लोग इसे अपने आहार में शामिल कर रहे हैं। मशरूम न केवल स्वादिष्ट होता है, बल्कि इसमें प्रोटीन, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व भी भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो इसे एक सम्पूर्ण स्वास्थ्यवर्धक विकल्प बनाते हैं। भारत में कई तरह के मशरूम पाए जाते हैं, जो अपने अलग-अलग स्वाद, बनावट और पोषण गुणों के कारण लोकप्रिय हो रहे हैं। आइए जानते हैं देश में उगाए जाने वाले कुछ प्रमुख मशरूम और उनके फायदे:

सफेद बटन मशरूम: भारतीय बाजार में सबसे आम तौर पर उपलब्ध मशरूम की किस्म है सफेद बटन मशरूम। इसका स्वाद हल्का होता है और यह कम कैलोरी वाला होने के साथ-साथ प्रोटीन, फाइबर और विटामिन D का अच्छा स्रोत है। यह हड्डियों को मजबूत बनाता है और त्वचा को भी स्वस्थ रखता है। साथ ही इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर को हानिकारक कणों से बचाते हैं।

ऑयस्टर मशरूम: यह आकार में बड़ा और बनावट में मखमली होता है। इसकी सुगंध हल्की मीठी और सौंफ जैसी होती है। ऑयस्टर मशरूम खासतौर पर कोलेस्ट्रॉल घटाने और हृदय स्वास्थ्य सुधारने के लिए जाना जाता है। इसमें वसा की मात्रा कम होती है और विटामिन B6 तथा थायमिन जैसे पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं।

शिमेजी मशरूम: जापानी खाने में प्रचलित यह मशरूम भारत में भी अब लोकप्रिय हो रहा है। यह पकाने के बाद मीठा और कुरकुरा हो जाता है। शिमेजी मशरूम में प्रोटीन, जिंक और विटामिन-B की भरपूर मात्रा होती है, जो पाचन सुधारने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है।

एनोकी मशरूम: छोटे और पतले सफेद तने वाला यह मशरूम “विंटर मशरूम” के नाम से भी जाना जाता है। इसे कच्चा या पका कर खाया जा सकता है। इसमें विटामिन B3, आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और सेलेनियम जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व होते हैं। यह शरीर में खून बनाने, पाचन सुधारने और हड्डियों को मजबूत करने में लाभकारी होता है।

धान के भूसे का मशरूम: भारत में 80 साल से अधिक समय से उगाए जा रहे इस मशरूम की खेती करना आसान होता है। यह स्वाद और पोषण में सफेद बटन मशरूम जैसा ही होता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक इंसुलिन इसे डायबिटीज के रोगियों के लिए उपयोगी बनाता है। यह मशरूम पाचन तंत्र की सेहत सुधारता है और गर्मियों में ठंडक देने वाला प्रभाव भी डालता है।

भारत में मशरूम की बढ़ती लोकप्रियता इस बात का संकेत है कि उपभोक्ता अब सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि पोषण को भी प्राथमिकता देने लगे हैं। ऐसे में मशरूम न सिर्फ रसोई की पसंद बन रहा है, बल्कि स्वस्थ जीवनशैली के अहम हिस्से के रूप में भी उभर रहा है। कृषि और खाद्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मशरूम की खेती को उचित प्रशिक्षण और समर्थन मिले, तो यह न केवल पोषण का स्रोत होगा बल्कि किसानों के लिए आय का नया साधन भी बन सकता है।

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