कृषि समाचार

एक क्लस्टर एक फसल मॉडल से यूपी की सिंचाई व्यवस्था होगी स्मार्ट

One cluster one crop model will make UP's irrigation system smart

लखनऊ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में उत्तर प्रदेश सरकार ने कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वॉटर मैनेजमेंट (MCAD) योजना के तहत ‘एक क्लस्टर, एक फसल’ मॉडल लागू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए केंद्र सरकार ने 1,600 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पारंपरिक सिंचाई की जगह खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए प्रेशराइज्ड पाइप इरिगेशन नेटवर्क (PPIN) तकनीक अपनाई जाएगी, जिससे जल उपयोग की दक्षता 90 प्रतिशत तक बढ़ेगी। इसका सीधा लाभ किसानों को होगा जैसे पानी की बचत होगी, उत्पादन बढ़ेगा और बिजली की खपत घटेगी।

तीन स्तरों पर होगी निगरानी

योजना की निगरानी तीन स्तरों पर की जाएगी – राष्ट्रीय, राज्य और जिला। इसे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) के अंतर्गत लागू किया गया है। इसमें कमांड एरिया डेवलपमेंट एंड वॉटर मैनेजमेंट (CADWM) और एक्सेलेरेटेड इरिगेशन बेनिफिट प्रोग्राम (AIBP) एकीकृत रूप से काम करेंगे। योजना के पहले चरण को मार्च 2026 तक पूरा करना है, इसके बाद दूसरा चरण अप्रैल 2026 से शुरू होगा। प्रत्येक क्लस्टर में 50 से 5,000 हेक्टेयर तक का क्षेत्र शामिल होगा, जिसमें वॉटर यूज़र सोसायटी (WUS) की स्थापना की जाएगी। इससे स्थानीय किसानों की भागीदारी बढ़ेगी, सामूहिक निर्णय लिए जाएंगे और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। इस योजना में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश किया जा रहा है। IoT, SCADA, GIS और सैटेलाइट मॉनिटरिंग के जरिए सिंचाई नेटवर्क की निगरानी की जाएगी। केंद्रीय स्तर पर जल शक्ति मंत्रालय के सचिव, राज्य स्तर पर मुख्य सचिव और जिला स्तर पर जिलाधिकारी योजना की प्रगति पर नजर रखेंगे।

युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण

वाओं को सिंचाई प्रणाली के उपकरणों जैसे पाइप, पंप, सेंसर, फिल्टर आदि के संचालन, रखरखाव और प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। साथ ही, यह योजना स्थानीय MSMEs और ‘मेक इन इंडिया’ को भी बढ़ावा देगी। उपकरणों के निर्माण और आपूर्ति से प्रदेश के लघु एवं मध्यम उद्योगों को मजबूती मिलेगी। MCAD योजना और ‘एक क्लस्टर, एक फसल’ मॉडल उत्तर प्रदेश की सिंचाई प्रणाली को आधुनिक, टिकाऊ और स्मार्ट बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे न केवल जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिलेगी।

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