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योगी सरकार की पहल से हजारों महिलाएं बनीं ‘लखपति दीदी’

Yogi government

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने और ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार का प्रयास लगातार तेज हो रहा है। इसी कड़ी में उत्तर प्रदेश राज्य आजीविका मिशन और ग्राम्य विकास विभाग द्वारा महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त करने के लिए बड़े स्तर पर काम किया जा रहा है। दीनदयाल अन्त्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) के तहत स्वयं सहायता समूहों और सामुदायिक संस्थाओं के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर उन्हें सतत आजीविका से जोड़ा जा रहा है। सरकार का लक्ष्य अधिक से अधिक महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाना है, जिस पर युद्धस्तर पर कार्य किया जा रहा है।

दुग्ध वैल्यू चेन से बदली महिलाओं की आर्थिक स्थिति

ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में दुग्ध वैल्यू चेन के अंतर्गत गठित मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनियों की भूमिका अहम साबित हो रही है। इन कम्पनियों के जरिए महिलाएं न केवल दुग्ध उत्पादन से जुड़ रही हैं, बल्कि दूध के संग्रहण, विपणन और भुगतान की पारदर्शी व्यवस्था से उन्हें सीधा लाभ मिल रहा है। इससे ग्रामीण महिलाओं की आमदनी में लगातार इजाफा हो रहा है।

बुंदेलखंड की बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी बनी मिसाल

बुंदेलखंड क्षेत्र में संचालित बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण बनकर सामने आई है। इस कम्पनी ने महिलाओं को दुग्ध उत्पादन और विपणन से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का काम किया है। बलिनी ने यह साबित किया है कि संगठित प्रयासों से ग्रामीण महिलाएं भी बड़े स्तर पर आर्थिक सफलता हासिल कर सकती हैं।

2019 में हुई स्थापना, महिलाओं के हित पर फोकस

राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के अनुसार बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी की स्थापना वर्ष 2019 में झांसी जनपद में की गई थी। कम्पनी का मुख्य उद्देश्य महिला दुग्ध उत्पादकों के हितों की रक्षा करना, दूध का पारदर्शी तरीके से संग्रहण करना, समय पर भुगतान सुनिश्चित करना और पशुधन से जुड़ी जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराना है।

बिचौलियों से मुक्ति, सीधा फायदा किसानों को

बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनी के माध्यम से दूध संग्रहण से लेकर भंडारण तक की पूरी प्रक्रिया से बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर दी गई है। इसके अलावा पशुओं के लिए हरे चारे की व्यवस्था, कृत्रिम गर्भाधान और गुणवत्तायुक्त पशु आहार जैसी सुविधाएं भी महिलाओं को दी जा रही हैं। इससे महिला दुग्ध उत्पादकों को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

रोजाना 9.15 लाख लीटर से ज्यादा दूध का संग्रह

वर्तमान में बुंदेलखंड के सात जनपदों के 1351 गांवों से करीब 90 हजार महिलाएं प्रतिदिन 2.72 लाख लीटर से अधिक दूध का संग्रह कर रही हैं। इनमें से लगभग 20 हजार महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। प्रदेश स्तर पर बलिनी, सामर्थ्य, काशी, बाबा गोरखनाथ और सृजनी मिल्क प्रोड्यूसर कम्पनियों के जरिए 31 जनपदों के 5205 गांवों से 2.89 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों द्वारा प्रतिदिन 9.15 लाख लीटर से ज्यादा दूध का संग्रह किया जा रहा है। इन प्रयासों से अब तक 45,611 से अधिक महिलाएं लखपति श्रेणी में पहुंच चुकी हैं।

ग्रामीण महिलाओं की यह सामूहिक पहल न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि उत्तर प्रदेश में समावेशी विकास, महिला सशक्तिकरण और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के सरकार के लक्ष्य को भी नई मजबूती दे रही है।

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