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योगी सरकार ने गन्ने के मूल्य में नहीं की बढ़ोतरी, किसानों को मिला बड़ा झटका

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस बार गन्ने का समर्थन मूल्य (SAP) नहीं बढ़ाने का निर्णय लिया है। किसानों को पिछले वर्ष के समान ही गन्ने का मूल्य मिलेगा, जो कि 370 रुपये प्रति क्विंटल रहेगा। सोमवार को कैबिनेट बाई सर्कुलेशन के माध्यम से सरकार ने यह फैसला लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट सत्र से पहले प्रदेश के 10 प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिसमें गन्ने का समर्थन मूल्य भी शामिल था।

इस फैसले से प्रदेश के लगभग 50 लाख गन्ना किसानों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि उन्हें उम्मीद थी कि गन्ने के मूल्य में इस बार बढ़ोतरी होगी। गौरतलब है कि योगी सरकार ने लगातार दूसरे साल गन्ने का मूल्य नहीं बढ़ाया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में भी गन्ने का समर्थन मूल्य 370 रुपये प्रति क्विंटल ही रहेगा, जैसा कि पिछले वर्ष था।

लोकसभा चुनाव से पहले बढ़ाया गया था गन्ने का मूल्य

यह फैसला उस समय आया है जब लोकसभा चुनाव 2024 करीब हैं। पिछले लोकसभा चुनाव से पहले योगी सरकार ने गन्ने का मूल्य 20 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया था। 2017 में बीजेपी की सरकार बनने के बाद से गन्ने का मूल्य लगातार बढ़ाया गया था। 2022 विधानसभा चुनाव से पहले 2021 में भी गन्ने के मूल्य में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई थी। इस तरह देखा जाए तो पिछले सात वर्षों में योगी सरकार ने गन्ने का समर्थन मूल्य 55 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया है।

गन्ना मंत्री का बयान

गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री चौधरी लक्ष्मीनारायण ने कहा कि प्रदेश की सभी चीनी मिलों से खरीदी जाने वाली गन्ने की कीमत 370 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है और इसमें कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है।

राकेश टिकैत ने किया सरकार पर हमला

वहीं, किसान नेता राकेश टिकैत ने गन्ने के मूल्य को लेकर सरकार पर हमला बोला। मुजफ्फरनगर में आयोजित भाकियू की महापंचायत में उन्होंने कहा कि गन्ने का पेराई सत्र समाप्त होने वाला है, लेकिन सरकार ने अभी तक गन्ने के भाव का ऐलान नहीं किया है। उन्होंने सरकार से अपील की कि गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल किया जाए और मिलों का बकाया भुगतान अविलंब किया जाए।

किसानों को चाहिए स्पष्टता

राकेश टिकैत ने आगे कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि गन्ने के भाव में बढ़ोतरी कब और कितना होगी। अगर सरकार अगले साल के लिए पहले से ही निर्णय ले देती है, तो किसानों को अपनी फसल तैयार करने का उचित समय मिलेगा। इससे वे अपने उत्पादन के आधार पर दाम बढ़ाने की योजना बना सकेंगे।

उत्तर प्रदेश में कुल 120 चीनी मिलों में से 93 मिलें निजी क्षेत्र की हैं, 24 मिलें सहकारी क्षेत्र की हैं, और तीन मिलें उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम (UPSSC) के अंतर्गत हैं।

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